'बाबा बंदा बहादुर' के नाम पर सरकार ने जारी किया चांदी का सिक्का

प्रभाकर मिश्रा, मनीष कुमार, नई दिल्ली, (21 जून): पंजाब की सियासत में 'उड़ता पंजाब' के पर कतरने की साजिश में लगे लोग अब अपने फायदे के लिए सिख समाज के वीर शहीदों का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब के एक ऐसे ही महापुरुष हुए बाबा बंदा सिंह बहादुर। कल तक इनकी शहादत का कोई नामलेवा नहीं था आज केजरीवाल से लेकर मोदी तक बाबा का नाम लेकर पंजाब की सियासत हड़पने की कोशिश में लगे हैं। केजरीवाल ने पुल का नाम रखा तो मोदी ने सिक्का जारी करवा दिया। 

बाबा बंदा बहादुर के नाम पर सरकार ने सिक्का भी जारी कर दिया। दिल्ली में इन दिनों बाबा का नाम ऊंचा करने की होड़ लगी है। रात दिन बाबा के नाम का जाप हो रहा है। पिछले दिनों केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के बारापुला पुल का नाम बाबा बंदा बहादुर के नाम कर दिया। तो केंद्र ने इसका जवाब कुछ यूं दिया कि पिछले दिनों सरकार के पोस्टल विभाग ने सबसे पहले बाबा के नाम पर पोस्टल कवर जारी किया। और अब केंद्रीय वित्त मंत्री के करकमलों से चांदी का सिक्का जारी करवा दिया गया। इतना ही नहीं है बाबा की 300वीं शहीदी दिवस मनाने की तैयारी चल रही है। बड़ा जलसा होगा। बाबा के नाम पर पंजाब में उड़ान भरने की तैयारी है। 

चुनावी मौसम में फिल्म के टाइटल का बहाना लेकर कांट-छांट के सिफारिशी लोग अपने इरादे अनकट जाहिर कर रहे है। पंजाब में बाबा बंदा बहादुर की वीरता के किस्से लोगों के जुबान पर हैं। लेकिन दिल्ली के लोगों के जेहन में बाबा का कहीं अतापता नहीं था। पंजाब में अपनी पैठ जमाने के लिए केजरीवाल सरकार ने सबसे पहले बाबा के बलिदान को याद करते हुए 11 जून को पूरे पेज का विज्ञापन छपवाया। फिर बारापुला फ्लाईओवर बाबा बंदा बहादुर सेतु हो गया। अब 10 से 20 ग्राम वाले चांदी के सिक्के से बीजेपी अपनी राजनीति चमकाने जा रही है। सरकारी कंपनी एमएमटीसी ने इसे तैयार किया है।

केंद्र सरकार ने एलान किया है कि अगले 10 से 15 दिनों तक बाबा बंदा सिंह बहादुर का 300 वां शहीदी दिवस मनाया जाएगा। एक खास कार्यक्रम 3 जुलाई को इंदिरा गांधी स्टेडियम में होना है, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत करेंगे। इस कार्यक्रम की आयोजक पंजाब सरकार और सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी है। इतनी तेज राजनीति हो रही है केजरीवाल किसी भी वक्त बाबा के नाम पर कोई बड़ा एलान कर सकते हैं।

इतिहास कहता है कि बाबा बंदा सिंह बहादुर सिख समाज के सम्मान के लिए मुगलों से लोहा लेते हुए कुर्बान हुए थे। आज बाबा के नाम पर राजनीति करने वाले लोग एकदूसरे से लोहा ले रहे हैं। कुर्बानी देने वाले बाबा के नाम पर एक दूसरे की सियासत का का गला काटने को तैयार बैठे हैं।