सिख सैनिक से 'भेदभावपूर्ण जांच' ! अमेरिकी सेना पर किया मुकदमा

नई दिल्ली (1 मार्च): अपने तरह के पहले मुकदमे में एक सिख-अमेरिकी सैनिक ने अमेरिकी सेना पर गंभीर आरोप लगाया है। सिख सैनिक का कहना है कि उसके धार्मिक आस्था के चलते उन्हें 'भेदभावपूर्ण जांच' का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की जांच से दूसरे सैनिकों को नहीं गुजरना होता।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप लगाने वाले सिख सैनिक का नाम कैप्टन सिमरतपाल सिंह है। उन्हें पिछले दिसंबर अमेरिकी सेना में सेवा करने के दौरान पगड़ी, बाल और दाढ़ी की देखभाल करने के लिए अस्थाई धार्मिक अकॉमोडेशन दिया गया था। 

यह अकॉमोडेशन अमेरिकी सेना में एक 'दुर्लभ अपवाद' है, जो 31 मार्च तक प्रभाव में रहना था। लेकिन अप्रत्याशित तौर पर कदम पीछे रखते हुए अमेरिकी सेना ने हाल ही में सिंह को आदेश दिया कि वह मंगलवार को 'एक्स्ट्रा-ऑर्डिनिरी, नॉन-स्टैंडर्ड एडीशनल टेस्टिंग' के लिए रिपोर्ट करें। इसे सेना में बने रहने के लिए एक शर्त के तौर पर रखा गया। सिंह का प्रतिनिधित्व करने वाली अंतर्राष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ संस्था मैकडरमॉट विल एंड एमरी ने एक बयान में इसकी जानकारी दी।

संस्था ने सिख-कोएलिशन और बेकेट फंड फॉर रिलीजियस लिबर्टी ने डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। सिंह अफगानिस्तान की रोड्स से विस्फोटकों को अलग करने के लिए ब्रॉन्ज़ स्टार जीत चुके हैं। इसके अलावा कई पोजीशन्स पर रहते हुए सैन्य उपलब्धियां भी हासिल कर चुके हैं। सिमरतपाल सिंह को तीन दिनों के लिए जांच से गुजरना होगा। जिसके लिए किसी भी अन्य सैनिक को नहीं गुजरना होता। इनमें पहले के सिख सैनिकों के अलावा वो भी सैनिक शामिल हैं, जिन्हें मेडिकल कारणों से दाढ़ी रखने की मंजूरी मिली हुई है।