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खुशखबरी: पर्यटकों के लिए खुला दुनिया का सबसे ऊंचा रणक्षेत्र

भारत समेत दुनियाभर के पर्यटकों के लिए खुशखबरी है। अब दुनियाभर के पर्यटक दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र का भी भ्रमण कर सकेंगे। पर्यटकों के लिए सियाचिन को खोल दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सियाचिन को अब पर्यटकों और पर्यटन के लिए खोले जाने का ऐलान किया।

 

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 अक्टूबर): भारत समेत दुनियाभर के पर्यटकों के लिए खुशखबरी है। अब दुनियाभर के पर्यटक दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र का भी भ्रमण कर सकेंगे। पर्यटकों के लिए सियाचिन को खोल दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सियाचिन को अब पर्यटकों और पर्यटन के लिए खोले जाने का ऐलान किया। पर्यटकों के लिए सियाचिन बेस कैंप से लेकर कुमार पोस्ट तक, पूरा इलाका पर्यटन के लिए खोल दिया गया है।  राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर सियाचिन को पर्यटकों के लिए खोले जाने का एलान किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- लद्दाख की श्योक नदी पर बने कर्नल चेवांग रिनचेन ब्रिज को देश को सौंपते हुए खुशी का अहसास हो रहा है।

दरअसल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को लद्दाख में कर्नल चेवांग रिनचेन ब्रिज का उद्घाटन कर दिया। इस पुल के उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सियाचिन को भी अब पर्यटकों और पर्यटन के लिए खोल दिया गया है। राजनाथ के सियाचिन दौरे के दौरान सेनाप्रमुख बिपिन रावत भी मौजूद थे। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने सियाचिन आधार शिविर से लेकर कुमार पोस्ट तक समूचे क्षेत्र को पर्यटन उद्देश्यों के लिए खोलने का निर्णय किया है। 

उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि लोग देख सकें कि सेना के जवान और इंजीनियर अत्यंत प्रतिकूल मौसम और विषम क्षेत्र में किस तरह काम करते हैं। पूर्वी लद्दाख में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'लद्दाख के सांसद ने अपने संबोधन में इस क्षेत्र को पर्यटन के लिए खोलने का उल्लेख किया था। और, मुझे यह बात साझा करने में खुशी हो रही है कि सरकार ने सियाचिन आधार शिविर से लेकर कुमार पोस्ट तक एक मार्ग खोलने का फैसला किया है।' 

 

एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में पिछले 10 साल में सेना ने अपने 163 कर्मियों को खोया है। भारत और पाकिस्तान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ग्लेशियर क्षेत्र में 1984 में सैनिकों की तैनाती शुरू की थी और तब तक यहां पर्वतारोहण अभियानों की मंजूरी थी। साल 1984 में 'ऑपरेशन मेघदूत' के बाद ग्लेशियर भारत के नियंत्रण में आ गया था। उत्तरी कमान के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बी एस जसवाल का हालांकि, मानना है कि पर्यावरण संबंधी मुद्दे चिंता का विषय होंगे।

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