चीन की चतुर चाल में फंसा श्रीलंका, कर्ज नहीं चुका पाने पर देना पडे़गा बंदरगाह

नई दिल्ली ( 31 अक्टूबर ) :  श्रीलंका अपने कर्ज को कम करने के लिए दक्षिणी बंदरगाह का 80 फीसद हिस्सा 1.5 बिलियन डॉलर की कीमत पर चीन की कंपनी को बेच देगा। खबरों के मुताबिक अप्रैल में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने चीनी दौरे के दौरान यह ऑफर किया था।

पूर्व नेता महिंदा राजपक्षे के शासन के दौरान हंबनटोटा बंदरगाह चीन से कर्ज और कंट्रैक्टर्स की मदद लेकर वर्ष 2010 में बनाया गया था। चीन की तरह कुछ अन्य देशों के लिए यह बंदरगाह सिल्क रूट ट्रांजिट प्वाइंट है। इस बंदरगाह में चीन की रुचि इसके ‘मैरिटाइम सिल्क रुट’ बनाने के लक्ष्य के तौर पर देखी जाती है। इससे भारत और अमेरिका समेत कुछ देशों में चिंता की लकीरें उभर आएंगी।

श्रीलंका के वित्त मंत्री करुणानायक ने बताया कि इसकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर से अधिक हो जाएगी और इस डील पर नवंबर के दूसरे हफ्ते में हस्ताक्षर किया जाएगा। उन्होंने उस कंपनी का नाम लेने से इंकार कर दिया जिसके साथ यह सौदा होगा। करुणानायक ने बताया, इस डील से मिलने वाली रकम से विदेशी कर्ज चुकाए जाएंगे। 

लेकिन चीन का यह कदम भारत को भारत को चिंतित करने वाला है।