आसाराम के 'सुपारी किलर' का खुलासा, ऐसे हुए थे 3 गवाहों के कत्ल

नई दिल्ली (15 मार्च): आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले गवाहों का कातिल कार्तिक पकड़ा गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर गवाहों के कत्ल से पर्दा उठाने का दावा किया है। कार्तिक को अमृत प्रजापति की हत्या के बाद आसाराम के समर्थको ने 25 लाख रुापए चुकाए थे। 

जेल में बंद हैं आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं लेकिन जेल से बाहर बाप-बेटे की करतूतों को बेपर्दा करने वाले बेमौत मारे जा रहे थे , बाप-बेटों के गुनाहों के गवाहों को जान से मारा जा रहा था ताकि अदालत तक कोई गवाह पहुंच नहीं सके , और इस खूनी खेल में कार्तिक सुपारी किलर की भूमिका में था।

नाम - कृपाल सिंह  तारीख - 10 जुलाई , 2015 जगह - शाहजहांपुर  35 साल के कृपाल सिंह की शाहजहाँपुर में गोली मार कर हत्या कर दी गई। बलात्कार के एक मामले के मुख्य गवाह कृपाल सिंह पर शाहजहांपुर में दो मोटरसाइकिल सवारों ने तब गोलियां चलाई थीं, जब वो अपने घर लौट रहे थे। कृपास से पहले मुजफ्फरनगर में भी इस कातिल ने अखिल का खून किया था।

नाम - अखिल गुप्ता तारीख - 11 जनवरी 2015 जगह- मुज़फ्फ़रनगर जनवरी 2015 में आसाराम के कई राज जानने वाले उनके रसोइये अखिल की गोली मार कर मुजफ्फरनगर में हत्या कर दी गई। अखिल ने भी आसाराम के खिलाफ गवाही दी थी।

नाम- अमृत प्रजापति तारीख - 23 मई 2014 जगह- राजकोट राजकोट में अमृत प्रजापति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अमृत प्रजापति वही शख्स है जो पहले आसाराम के वैद्य थे और उनके आश्रम में रहते थे लेकिन फिर आसाराम की हकीकत जानने के बाद उन्होंने उसके खिलाफ कई मामलो में गवाही दी थी। अमृत ने मीडिया से लेकर अदालत तक आसाराम के पापों का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया था।

ये सभी गवाह अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन इनकी गवाही इतनी मजबूत थी कि आजतक बाप-बेटों को जेल में बंद रहना मजबूर कर दिया। लेकिन कातिल का इरादा तो कुछ और ही था। किलर हर उस शख्स के खून का प्यासा था जो गवाह थे, इसलिए इनके अलावा 5 और लोगों को भी अपना निशाना बनाया लेकिन ये सभी बच गए।

नाम- महेंद्र चावला तारीख - 13 मई 2015 जगह- पानीपत नारायण साईं के पर्सनल सेक्रेटरी रहे महेंद्र चावला पर भी हमला हुआ क्योंकि महेंद्र भी आसाराम के खिलाफ हो गए थे और बाप-बेटे से जुड़े कई घिनौनी करतूत को बेपर्दा किया था। जानकारी के मुताबिक कार्तिक के निशाने पर महेंद्र के अलावा लालजी ठोकरे , राजू चंडोक, ओम प्रकाश प्रजापति रहे। लेकिन इन सभी हमलों में कार्तिक अकेले नहीं था। 

दूसरी बात ये कि कार्तिक ने जिन लोगों पर हमला किया उसके अलावा राहुल सचान, दिनेश भागचंदानी विमलेश ठक्कर, राकेश पटेल भी हैं जिनपर हमले हुए है। क्योंकि इन सभी ने आसाराम के खिलाफ अदालत में गवाही दी थी, मुकदमा दर्ज किया था। अब सवाल ये उठता है कि इनकी जान लेना वाला कौन था। 

पुलिस ने कार्तिक को गिरफ्तार कर गवाहों के कत्ल की गुत्थी से पर्दा उठाने का दावा किया है। लेकिन अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं, जैसे हत्या में कार्तिक के साथ और कौन-कौन शामिल थे, हत्यारे को हत्या की सुपारी कौन देता है, आश्रम में रहने वाला कार्तिक हत्या किसके इशारे पर करता था। 

ये सवाल इसलिए जरूरी हैं कि जितने गवाहों पर हमले हुए सभी ने एक सुर में कहा है कि आसाराम के गुर्गे उनकी जान के पीछे पड़े हैं, और कभी भी हमला कर सकता हैं और हुआ भी वही।