आसाराम मामले में गवाहों को मारने वाला शूटर गिरफ्तार

जोधपुर (15 मार्च): जोधपुर जेल में बंद आसाराम के काले कारनामों की फेहरिस्त में अब हत्या के दाग भी लग सकते हैं, क्योंकि पुलिस ने आसाराम के एक ऐसे राजदार को गिरफ्तार कर लिया जो आसाराम को जेल के अंदर नहीं देख सकता था। जिसने जेल से बाहर निकालने के लिए आसाराम के गुनाहों की गवाही देने वालों को मिटाने की सुपारी ले रखी थी।

आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले गवाहों का कातिल पकड़ा गया है। गुजरात एटीएस का दावा है कि उसने एक शूटर को गिरफ्तार किया जो आसाराम को भगवान मानता है और आसाराम के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को खामोश कर देता था।

पुलिस का दावा है कि इस खूंखार ने हर उस आवाज को खामोश कर दिया जिसने आसाराम के खिलाफ मुंह खोलने की जुर्रत दिखाई। काले कपड़े से ढका मुंह , पांव में साधारण चप्पल पहले ये वही खूंखार है जिसने तीन राज्यों की पुलिस, एसआईटी और सीबीआई की नींद हराम कर रखी थी।  

पुलिस का दावा है कि ये वही गवाहों का कातिल जिसने राजकोट में अमृत प्रजापति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। ये वही हत्यारा जिसने शाहजहांपुर में कृपाल सिंह को मौत के घाट उतार दिया था। ये वही खूंखार है जो यूपी के मुज़फ्फरनगर में अखिल की हत्या की थी। कार्तिक हर उस व्यक्ति के खून का प्यासा था जो आसाराम के खिलाफ गवाही दे रहे थे।

हरियाणा के महेंद्र चावला, अहमदाबाद के लालजी ठाकरे सभी इसी की गोली का शिकार हुए हैं। यानी यूपी, गुजरात, हरियाणा, एमपी सभी राज्यों में ये चुन-चुनकर गवाहों का सफाया कर रहा था ताकि आसाराम बाइज्जत बरी हो जाएं। पुलिस की पूछताछ में इस शातिर कीलर ने हर वो राज उगले हैं जो सीधे जेल में बंद आसाराम तक जाते हैं। पुलिस के मुताबिक इस कीलर ने अमृत प्रजापति, कृपाल सिंह और अखिल को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया और महेंद्र चावला, लालजी ठाकोर, राजू चंडोक, ओम प्रकाश प्रजापति, सीमा प्रजापति, पर जानलेवा हमला किया।

चौकाने वाली बात ये है की कार्तिक को अमृत प्रजापति की हत्या के बाद आसाराम के समर्थको ने 25 लाख रुपए चुकाए थे। प्रवीण वकील, के डी पटेल, संजय जोधपुर और मोहन किशोर ये कुछ ऐसे नाम हैं जो कार्तिक की मदद करते थे। जानकारी के मुताबिक इन्ही लोगो से कार्तिक को आसाराम का संदेसा मिलता था ऐसे में पुलिस इस दिशा में गहराई से तफ्तीश कर रही है। 

बताया जा रहा है कि कार्तिक साल 2000 में  दिल्ली में आसाराम के आश्रम में सत्संग में शामिल हुआ था। उसके बाद 2001 में अहमदाबाद के आश्रम में साधु बनकर रहने लगा था। आश्रम मामले में एटीएस इसे एक बड़ी सफलता के तौर पर देख रही है और फ़िलहाल इस मामले में और भी तफ्तीश कर आश्रम और नारयण साईं से ईस हत्यारे के सम्बन्ध की जांच कर रही है। पुलिस ये भी पता लगाने की कोशिश कर रही है की आखिरकार कार्तिक को इन हत्याओ और हमलो के लिए कुल कितने रुपये मिले और वो किसने दिए।