ओलंपिक: भारत के खराब प्रदर्शन पर शोभा ने फिर मारा ताना

नई दिल्ली(14 अगस्त): शोभा डे ने रियो ओलंपिक्‍स में भारतीय खिलाडि़यों के खराब प्रदर्शन पर अपने ट्वीट का बचाव किया है। साथ ही इस मसले पर उनका मजाक उड़ा रहे लोगों पर पलटवार किया है। 

- शोभा डे ने एक अंग्रेजी अखबार में अपने लेख में एक ट्रॉलर के जरिए मजाक उड़ाने वालों पर हमला बोला। शोभा डे ने कहा था, ”हमारे खिलाडि़यों का लक्ष्‍य: रियो जाओ, सेल्‍फी लो और खाली हाथ वापस आओ। पैसे और अवसर की बर्बादी।”

- आर्टिकल में उन्‍होंने लिखा, ”आजकल ओपन लेटर लिखने का फैशन चल रहा है इसलिए मैं भी लेटर लिख रहा हूं। इस समय आप सबसे ज्‍यादा नफरत की जाने वाली व्‍यक्ति हैं। आप अपने आपको क्‍या समझती हैं? आप रियो में खेल रहे हमारे खिलाडि़यों की बेइज्‍जती कैसे कर सकती हैं? आपको ट्वीट कर हमारे मेहनती खिलाडि़यों को बुरा महसूस कराने का क्‍या हक है? क्‍या आप स्‍पोर्ट्स शब्‍द का उच्‍चारण भी कर सकती हैं? आप जैसे लोग अच्‍छे भारतीय नहीं हैं। आप जैसे लोग पांच सितारा होटलों में जाते हैं और अपने आप को महान समझते हैं। क्‍या 60 मिनट तक हॉकी मैदान में दौड़ सकती हैं। इसलिए अपना मुंह बंद रखो।”

- उन्‍होंने आगे लिखा, ”भारत ओलंपिक्‍स में खेल रहा है, नहीं? जीतना और हारना, इससे आपको कोई मतलब नहीं। अन्‍य छोटे और गरीब देशों से क्‍यों तुलना करती हो। हम भारत हैं। हम महान हैं। यदि हम रियो में एक भी पदक नहीं जीते तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता। हमने 70 साल में 7 या 8 पदक जीते हैं। यह एक उपलब्धि है। हमारे खिलाडि़यों को उत्‍साहवर्धन की जरूरत है। आप जैसे लोगों के होते हुए वे कांस्‍य पदक भी कैसे जीते सकते हैं। अपने ट्वीट पर लोगों के रिएक्‍शन देखो। मेरे जैसे ट्रॉलर्स ने गालियां देने का ओलंपिक जीत लिया है। लोकतंत्र में खुद को अभिव्‍यक्‍त करने का अधिकार है हमे। हम जितनी चाहे उतनी गालियों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।”

- शोभा ने बाद में भारत के खराब प्रदर्शन के कारणों को व्‍यंग्‍य के जरिए बताते हुए लिखा, ”ऐसा क्‍यों कहती हो कि इथोपिया जैसा गरीब देश सोने के पदक जीतने वाले मैराथन रनर पैदा करता है? ऐसा क्‍यों कहती हो कि वहां के रनर बिना जूते के दौड़ते हैं? हमारे गरीब खिलाडि़यों को भी समय पर किट नहीं मिलती है। आप कह रही हैं कि हमारे बाबुओं की खिंचाई की जानी चाहिए। उनकी खिंचाई कौन करेगा, दूसरे ? बाबू? भ्रष्‍टाचार, पक्षपात, ब्‍लैकमैल, डोपिंग चार्ज और आरोप, दूसरे देशों में भी ऐसा होता है। मेडल,मेडल और मेडल क्‍या ये ही सब कुछ होता है। हमारे खिलाड़ी बाहर जाते हैं वहां के लोगों से मिलते हैं। हां, ये ठीक बात है कि वे टैक्‍स के पैसे से जाते हैं। लेकिन आपका क्‍या जाता है। ये आपके बाप का पैसा नहीं है। माफी मांगों नीच, गिरी हुई औरत। अपने शब्‍द वापस लो। यदि हम कुछ नहीं जीते तो यह सब आपके कारण होगा।”