शिवसेना ने आडवाणी को दी सेवानिवृति की सलाह, कहा- वक्त को पहचानें 'भीष्म पितामह'


इंद्रजीत सिंह, न्यूज 24, मुंबई (23 मार्च): अपने 'लौह पुरुष' के बिना बीजेपी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है। गुजरात की जिस गांधीनगर सीट से आडवाणी 6 बार से सांसद बनते चले आ  रहे हैं, वहां से बीजेपी के अपने मौजूदा चाणक्य को उतारकर एक तरह से 91 साल के अपने सबसे उम्रदराज नेता के रिटायरमेंट का एनाउंसमेंट कर दिया। बीजेपी के इस फैसले के बाद  91 साल के लाल कृष्ण आडवाणी के सियासी सफर को खत्म माना जा रहा है। दो सांसदों वाली पार्टी को सत्ता के सिंहासन पहुचाने वाले नींव के पत्थर आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बीजेपी के मौजूदा वजूद के सबसे बड़े शिल्पकार आडवाणी, कांग्रेस के विपरीत ध्रुव की राजनीति के सशक्त और सफल हस्ताक्षर आडवाणी, 2019 लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी की पहली लिस्ट जारी हुई और वो अचानक सियासत का इतिहास बन गए।



इसी कड़ी में लाल कृष्ण आडवाणी को लेकर शिवसेना ने अपने मुख पत्र सामना में एक लेख लिखा है। शिव सेना ने समाना में लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी का आडवाणी युग खत्म हो चुका है गुजरात के गांधीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से आडवाणी 6 बार विजयी हुए हैं। अब गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से अमित शाह चुनाव लड़नेवाले हैं। इसका सीधा अर्थ ऐसा है कि भीष्माचार्य को पार्टी ने जबरन आराम करने के लिए भेज दिया है। वाजपेयी पार्टी का चेहरा तो आडवाणी सूत्रधार थे। अब मोदी और शाह ने वाजपेयी-आडवाणी का स्थान लिया है, इसे स्वीकार करना होगा। भारतीय जनता पार्टी में 2014 में परिवर्तन हुआ और आडवाणी पार्टी के कबाड़खाने में चले गए। पार्टी में क्या हुआ, यह उनका अंदरूनी सवाल है। हर किसी को कभी-न-कभी सेवानिवृत्त होना ही पड़ता है। मगर लोगों द्वारा जबरन सेवानिवृत्त किए जाने की बजाय खुद ही वक्त के कदमों को पहचानकर बगल हो जाने में समझदारी है। वे भाजपा के शिखर पुरुष हैं और रहेंगे।



पार्टी ने उन्हें रोका, इसमें बुजुर्ग आडवाणी का अपमान हुआ, ऐसा छाती पीटने की कम-से-कम कांग्रेस को जरूरत नहीं है। जिन्होंने  नरसिंह राव को  मौत के बाद भी अपमानित किया और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते समय  राहुल सार्वजनिक सभा में मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए आदेश को फाड़कर उन्हें अपमानित कर रहे थे। सीताराम केसरी का आखिरकार क्या हाल हुआ? ऐसे में बुजुर्गों के मान-सम्मान की बात कांग्रेस के मुंह से शोभा नहीं देती। आडवाणी ने जो बोया उसका ही फल आज भाजपा खा रही है।  इसलिए आडवाणी का मार्गदर्शन हम भी लेते रहेंगे। 91 वर्ष के इस भीष्म पितामह को हमारा शत शत  प्रणाम।