बीजेपी को चुनाव के समय ही क्यों याद आते हैं राम- शिवसेना



न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 नवंबर): 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार और बीजेपी पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा दवाब है। साधु-संतों के साथ कई संगठन और राजनीतिक दल मोदी पर पर अपना दवाब बढ़ दिया है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर रविवार को वीएचपी धर्मसभा करने जा रही है तो शनिवार को उद्धव भी अयोध्या पहुंचने वाले हैं। शिवसेना ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए मोदी सरकार के लिए आक्रमक रुख अपना लिया है। शिवसेना ने अपने मुख पत्र सामना के जरिए एकबार फिर केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमला बोला है।
शिवसेना ने अपने मुख पत्र सामना में लिखा है कि हम अयोध्या की ओर निकल रहे हैं। हमारे अयोध्या जाने की घोषणा के बाद अपने को हिंदुत्ववादी कहने वाले कुछ लोगों के पेट में मरोड़ क्यों उठ रही है ? हम राजनीति करने नहीं जा रहे हैं। राम के नाम पर वोटों का कटोरा लेकर दर-दर घूमें और फिर चुनाव आते ही जय श्रीराम का नारा दें ऐसा जुमलेबाजी हमारे खून में नहीं है। हम छत्रपति शिवाजी की स्थली से मिट्टी लेकर निकले हैं इससे कुछ लोगों के पायजामे क्यों ढीले हो गए ? अयोध्या मक्का मदीना में नहीं हमारी हिन्दू भूमि में ही है। हम राम दर्शन के लिए निकले हैं। इससे हिंदूवादी राजनीति करने वालों के भगवा वस्त्र चिंता में सफेद हो गए होंगे तो उनके भगवेपन की जांच करनी होगी।
साथ शिव सेना ने मुख पत्र में लिखा है कि अयोध्या किसी की निजी जगह नहीं है। वहां अब राम राज्य नहीं रहा, सर्वोच्च न्यायालय का राज है। लेकिन 1992 में बाबर के राज को हथोड़े से ध्वस्त करने का काम अंततः बालासाहेब के शिवसैनिकों को ही करना पड़ा था। ऐसी शिवसैनिक पर सरकार को अभिमान करना चाहिए। मगर इतने शिवसैनिक अयोध्या में क्यों ? इनका क्या काम, ऐसी शंका जताई जा रही है।  इसके बजाय सरकार को राम मंदिर की तारीख बताना चाहिए। जिस श्रद्धा से मोदी जी पशुपतिनाथ जाते हैं बनारस में गंगा आरती करते हैं उसी श्रद्धा से हम अयोध्या जा रहे हैं। हम अयोध्या के लिए निकले हैं तो इसकी चिंगारी उठने लगी है। ठाकरे ये ना करें वो ना करें। ऐसा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। राम मंदिर मुद्दे की देरी खींचे जाने का भय है। हमारे अयोध्या जाने से किसका ब्लड प्रेशर बढ़ा है ! अगर राम मंदिर मुद्दा निकल गया तो 2019 की रोजी रोटी का क्या इस पक्षघाटी झटके से कुछ लोगों की जीभ विकलांग हो गयी है। हम फिर वही कह रहे है सीधे अध्यादेश लाकर राम मंदिर निर्माण की तारीख ही घोषित क्यों नहीं कर देते।