'तीन तलाक' व्यवस्था को खत्म करने के समर्थन में उतरी शिवसेना, कहा...

नई दिल्ली (2 जून): शिवसेना ने गुरुवार को 'तीन तलाक' की प्रथा को खत्म किए जाने के समर्थन में अपनी आवाज उठाई। शिवसेना ने कहा कि यह परंपरा दिखाती है कि देश में मुस्लिम महिलाओं के लिए न्याय की लड़ाई कितनी मुश्किल है।

शिवसेना ने अपनी पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखा, "पिछले साल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और दूसरे संबंधित संस्थाओं ने तीन तलाक की व्यवस्था में बदलाव के लिए मना कर दिया।" 

सामना में 'सेकुलर' लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंदू धर्म में मौजूद कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई गई। लेकिन इस मुद्दे पर खामोशी क्यों रही?

शिवसेना ने कहा कि इस मूवमेंट को 1980 के शाह बानो केस के बाद एक नया जीवन मिला है। संपादकीय में कहा गया है, "गुवाहाटी की शमीना यासमीन और शमीना फारुखी, सायरा बानो के साथ अभी भी अपनी लड़ाई लड़ रही हैं। जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को चुनौती दी।"

शिवसेना ने कहा कि भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) की लड़ाई को पूरे भारत में समर्थन मिल रहा है। यह मुस्लिम महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण के तौर पर काम करेगा। 

गौरतलब है, शिवसेना की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब 50,000 मुस्लिम महिलाओं ने तलाक की इस व्यवस्था के खिलाफ पिटीशन पर हस्ताक्षर कर आवाज़ उठाई है। जिसके दुरुपयोग को लेकर महिला संगठनों ने काफी विरोध जताया है।

बीएमएमए ने राष्ट्रीय महिला आयोग से तीन तलाक की व्यवस्था को खत्म करने के लिए समर्थन की मांग की है। जिन्होंने इसे "गैर-इस्लामी" अभ्यास भी कहा है।