पांच महीने पहले हुई थी बच्चों की अदला-बदली, अब जाएंगे असली मां-बाप के पास

नई दिल्ली(22 अक्टूबर): हिमाचल हाईकोर्ट ने पांच महीने पुराने बच्चा अदला-बदली केस का इंसाफ कर दिया है। कोर्ट ने माना कि मातृ-शिशु अस्पताल केएनएच में नवजात बच्चों की स्वैपिंग हुई थी। 

- कोर्ट ने दोनों परिवार को कहा कि वो खुद तारीख तय कर ले, जब बच्चे को एक दूसरे को दिए जाएंगे। इसके बाद दोनों परिवार ने तय किया कि 26 अक्टूबर को एक दूसरे को बच्चे सौंप दिए जायेंगे।

- मुख्य न्यायधीश मंसूर अहमद मीर की खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहा कि इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा। इसके साथ ही न्यायधीश मीर ने बच्चों की अदला-बदली की घटना को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में दोनों ही परिवारों के साथ ज्यादती हुई है। न्यायमूर्ति मीर ने दोनों बच्चों के अभिभावकों से कहा कि बच्चों को अलग करना असहनीय पीड़ादायक होगा, लेकिन यदि दोनों परिवार इन बच्चों को भाई-बहन मान कर जीवन में आगे बढ़ें तो वह पीड़ा धीरे-धीरे दूर हो जायेगी। 

- हाईकोर्ट ने पुलिस व हॉस्पिटल अथॉरिटी को आदेश दिए कि वह इस मामले को अपने लॉजिकल अंत तक पहुंचाये। कोर्ट की सलाह के बाद दोनों बच्चों के माता-पिता रजिस्ट्रार जनरल के कक्ष में आपसी समझौते के लिए हाजिर हुए। इसके बाद दोनों पक्ष 26 अक्टूबर को बच्चों को एक दूसरे से बदलेंगे। मामले पर अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

- करीब पांच महीने पहले महिला व शिशु कल्याण अस्पताल (केएनएच) में दो बच्चों की अदला-बदली हुई थी। मंडी में रहने वाली महिला शीतल ने 26 मई को बेटे को जन्म दी थी, उसी दिन शिमला की महिला अंजना ने बेटी को जन्म दिया। शीतल को पहले बताया गया कि बेटा हुआ लेकिन बाद में उसके गोद में बेटी डाल दी गयी। वहीं अंजना को शीतल का बेटा दे दिया गया

- जिसके बाद शीतल अपने पति अनिल के साथ अस्पताल प्रबंधन के पास शिकायत लेकर पहुंचे। जिसके बाद लड़की का डीएनए टेस्ट कराया गया। डीएनए टेस्ट माता-पिता से मौजूद नहीं हुआ। जिसके बाद वो पुलिस के पास बच्चों की अदला-बदली का मामला लेकर पहुंच गये, यहां पुलिस ने सहयोग नहीं किया। जिसके बाद दंपति ने हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाई।

- हाईकोर्ट ने शिमला पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए जांच का जिम्मा एसपी को सौंपा। एसपी ने गुरूवार को डीएनए रिपोर्ट अदालत में पेश की, जिसके मुताबिक वाकई बच्चों की अदला-बदली हुई।