मोदी सरकार का बड़ा वार, ऐसी कंपनियों के 4.5 लाख निदेशक अयोग्य करार

नई दिल्ली (5 अक्टूबर): मोदी सरकार किसी भी हालत में काले धन के कुबेरों को छोड़ना नहीं चाहती। ऐसे में सरकार की रडार पर शैल कंपनियों के निदेशक हैं। बताया जा रहा है कि इन कंपनियों ने नोटबंदी के समय में काले धन को सफेद करने में अहम भूमिका निभाई थी।

केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि सरकार ने शैल कंपनियों से जुड़े करीब 4.5 लाख निदेशकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। चौधरी ने कहा कि सरकार ऐसी कंपनियों को पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास कर रही है। मंत्रालय ने 22 सितंबर तक 2,17,239 कंपनियों का नाम रिकॉर्ड से हटाया था। ये कंपनियां लंबे समय से कारोबारी गतिविधियां नहीं कर रही हैं और साथ ही इन कंपनियों ने अनिवार्य रूप से जानकारी देने में चूक की है। मंत्रालय इस तरह की और कंपनियों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। चौधरी ने बताया कि 22 सितंबर तक कंपनी कानून, 2013 की धारा 164 :2: :ए: के तहत 3,19,637 ऐसे निदेशकों की पहचान की गई और उन्हें अयोग्य घोषित किया गया।

अनुमान है कि अंतिम आंकड़ा 4.5 लाख तक पहुंच जाएगा। धारा 164 निदेशक को अयोग्य घोषित करने से संबंधित है। उपधारा 164 (2) (ए) के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी में निदेशक है और उस कंपनी ने लगातार तीन वित्त वर्षों तक वित्तीय ब्योरा या वार्षिक रिटर्न नहीं दिया है तो उसे अयोग्य घोषित किया जाएगा।