लिम्‍का बुक में दर्ज है शीला का नाम, राष्ट्रपति दे चुके हैं महिला एचिवर पुरस्कार

नई दिल्ली (8 मार्च): शीला दावरे का परिचय देश की पहली महिला ऑटो ड्राइवर के रूप में है। 18 साल की उम्र में केवल 12 रुपये हाथ में लेकर वो घर छोड़कर परभणी से पुणे आ गईं। 30 साल पहले शीला की आंखों में केवल सपने थे।

1988 में शीला ने किराए का ऑटो लिया और अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया। तब पुणे में सारे ड्राइवर पुरुष थे जोकि खाकी ड्रेस में चलते थे। ऐसे में शीला ने सलवार कमीज पहनकर ही ऑटो चलाया। भारत की पहली महिला ऑटो ड्राइवर के तौर पर उनका नाम लिम्‍का बुक ऑफ वर्ल्‍ड रेकार्ड्स में भी दर्ज है।

इस साल राष्ट्रपति ने उनको महिला एचिवर पुरस्कार से भी नवाजा है। उनकी खुद की ट्रैवल कंपनी है। अब उनका सपना है कि वे एक अकादमी खोलें और महिलाओं को ऑटो रिक्‍शा चलाने का प्रशिक्षण दें। न्यूज 24 उनके जज्बे को सलाम करता है।

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