नवाज की कुर्सी छिनी तो मजबूत होगी पाक सेना, भारत की बढ़ेगी चिंता

नई दिल्ली (13 जुलाई): पनामा मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ बुरी तरह फंस चुके हैं। संयुक्त जांच समिति ने शरीफ के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने शरीफ परिवार के व्यापारिक लेनदेन की जांच की और रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी। उसने सिफारिश की है कि शरीफ और उनके बेटे हसन नवाज और हुसैन नवाज के साथ-साथ उनकी बेटी मरियम नवाज के खिलाफ भी राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) अध्यादेश, 1999 के तहत भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। ऐसे में यदि नवाज शरीफ की कुर्सी जाती है तो इसका भारत पर भी असर देखने को मिल सकता है।


सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट को लागू करने का फैसला करता है तो अगले सप्ताह तक शरीफ को या तो पद से हटाया जा सकता है या फिर पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिए जाएंगे। आने वाले हफ्तों या महीनों में इसका भारत पर भी असर होगा, विशेषकर सुरक्षा के मामले में।


शरीफ की जांच का नतीजा और अस्थिरता का परिणाम भारत को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्तान जब भी मुसीबत में होता है वह भारत और कश्मीर पर फोकस बढ़ा देता है। पाकिस्तान स्थित आंतकी समूहों ने दिखाया है कि वे जम्मू-कश्मीर तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं, जैसा कि हाल में अमरनाथ यात्रियों पर अटैक किया गया। यह कश्मीर घाटी में हिंसा को बढ़ाने का प्रयास हो सकता है ताकि सिविलियन गवर्नमेंट को बनाए रखने के अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाव किया जा सके।


नई दिल्ली में सत्ता का गलियारा भी इस बात पर सहमत नजर आता है। यहां भी शरीफ के बाद संभावित परिस्थितियों पर बात हो रही है। आम चुनाव में सिर्फ कुछ महीने का समय बचा है और यदि सेना लोकतांत्रिक मुखौटे को सुरक्षित रखना चाहती है तो शरीफ सरकार को तब तक बने रहने दे सकती है। दूसरा यह कि शरीफ के छोटे भाई शाहबाज दायित्व संभाल सकते हैं।