कंगाली में आटा गीलाः पाक से बोला IMF - कैसे लौटाओगे चीन का कर्जा, पहले यह बताओ

न्यूज24 ब्यूरो नई दिल्ली (13 अप्रैल): पैसे-पैसे को मोहताज पाकिस्तान के सामने आईएमएफ ने एक नई समस्या खड़ी कर दी है। आईएमएफ ने कहा है कि वो पाकिस्तान को 13वें बेल आउट पैकेज को तब तक स्वीकृति नहीं देगा जब तक पाकिस्तान वो चीन और अन्य देशों से लिए गये कर्ज से संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं करा देता। पाकिस्तानी प्रतिनिधि मण्डल के सामने आईएमएफ ने चिंता जाहिर की और कहा कि वो सर से पैर तक विदेशी कर्ज में डूबे पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज आंख बंद करके नहीं दे सकता।
दरअसल, पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच 13 वें बेलआउट पैकेज के लिए चल रहीं मीटिंग्स के दौरान अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से कहा कि पाकिस्तान आईएमएफ से मिलने वाले पैसे का एक बड़ा हिस्सा विदेशी कर्जे के ब्याज के भुगतान में दे सकता है। क्यों कि चीन पिछले तीन साल से पाकिस्तान पर कर्ज वापसी के लिए दबाव बना रहा है।

आईएमएफ से पहले पाकिस्तान ने चीन से मदद मांगी थी लेकिन चीन ने पाकिस्तान दो टूक मना कर दिया। आखिर में अभी 25 फरवरी को चीन ने पाकिस्तान को बाजारू ब्याज दरों पर दो बिलियन डॉलर का कर्जा दिया है। अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन और आईएमएफ से कहा कि जिस पाकिस्तान की इंडस्ट्री ठप है। इनकम के साधन नहीं हैं, विदेशी कर्ज का ब्याज तक देने के पैसे नहीं हैं, इतना ही नहीं विदेशों  को भुगतान के लिए जिसके पास विदेशी मुद्रा नहीं है। इन परिस्थितियों में पाकिस्तान सबसे पहले विदेशी कर्ज की तलवार को रोकने के लिए आईएमएफ से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल कर सकता है।
इसके अलावा आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाएं  से एफएटीएफ की रिपोर्ट्स का संज्ञान भी लेने को कहा गया है। अभी हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने खुद कहा है कि पाकिस्तान विदेशी मदद का दुरुपयोग आतंकवाद और कर्ज निपटारे के लिए करता रहा है। इसलिए भविष्य में उसे दी जाने वाली सभी सहायता परियोजनाओं की समीक्षा की जायेगी। ऐसा भी कहा जा रहा है कि यूएसएड के तहत हर साल सैंकड़ों मिलियन डॉलर की मदद पाकिस्तान को देने से पहले समीक्षा की जायेगी। अमेरिका का इरादा अब पाकिस्तान को फोकट में कोई मदद देने का नहीं है।

हालांकि, पाकिस्तानी मीडिया और सरकार कह रही है कि आईएमएफ के साथ उनकी वार्ता सकारात्मक चल रही है। 13वें बेलआउट का एग्रीमेंट भी तैयार हो चुका है और जल्द ही उस पर दस्तखत भी हो जायेंगे, लेकिन यह नहीं बताया है कि क्या पाकिस्ता, चीन से मिले कर्ज और निवेश के दस्तावेज आईएमएफ के हवाले करेगा और  क्या चीन उसे ऐसा करने की इजाजत देगा।

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