महिलाओं के शनि पूजा विवाद में कूदे शंकराचार्य

नई दिल्‍ली (28 जनवरी): शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को पूजा का अधिकार देने पर विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मुद्दे पर द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कूद पड़े हैं।

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने शनि पूजा का विरोध करते हुए कहा कि शनि को बुलाया नहीं भगाया जाता है। इतना ही नहीं उन्होंने शनि को भगवान मानने से इंकार करते हुए कहा कि वह एक ग्रह हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के मुताबिक पूजा भगवान की होती है, न की ग्रह की। ऐसे में महिलाओं को शनि पूजा से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

महिलाओं को अधिकार देने पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि देश में महिलाओं को सामाजिक अधिकार की बात है तो वो उन्हें मिल चुका है। वो देश के अहम पदों प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और लोकसभा के अध्यक्ष के पद पर रह चुकी हैं। अगर धर्म में सामाजिक न्याय की बात है तो धर्म मान्यताओं और परंपराओं पर चलता है। यहां सामाजिक न्याय जैसी कोई बात नहीं होती।

भूमाता ब्रिगेड की करीब 400 महिलाओं ने किया था प्रदर्शन भूमाता ब्रिगेड प्रमुख तृप्ति देसाई की मांग है कि शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को पूजा का अधिकार दिया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर उन्होंने 26 जनवरी को करीब 400 महिलाओं के साथ मंदिर के लिए कूच किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें कई लगभग 70 किमी किलोमीटर पहले ही रोक दिया। भूमाता ब्रिगेड का शनि देव की पूजा का अधिकार हासिल करने का प्रयास भले ही सफल नहीं हुआ, लेकिन इसका देशव्यापी असर हुआ। हालांकि, मंदिर अब भी इस पर अडिग है कि परंपरा का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा।