हार्दिक पटेल को झटका, राजद्रोह मामले में जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली(9 मार्च): गुजरात में अहमदाबाद की एक अदालत ने जेल में बंद पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच की ओर से दायर राजद्रोह के एक मामले में उनकी नियमित जमानत अर्जी को मंगलवार को खारिज कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एन जी दवे की अदालत ने गत चार मार्च को इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार को उन्होंने अपना फैसला सुनाते हुए जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।

इस बीच, हार्दिक के वकील रफीक लोखंडवाला ने बताया कि वह इस सप्ताह के अंत तक गुजरात हाई कोर्ट में हार्दिक की जमानत की अर्जी देंगे। गत 21 अक्टूबर को इस मामले को दर्ज कराने वाले क्राइम ब्रांच के एसीपी के एन पटेल ने बताया कि तीन अन्य आरोपी केतन पटेल, दिनेश पटेल और चिराग पटेल की ओर से बुधवार को जमानत की अर्जी दी जाएगी। दो अन्य आरोपी फरार घोषित हैं।

कोर्ट में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जे एस गेडम ने दायर हलफनामे में हार्दिक की जमानत का जोरदार विरोध करते हुए कहा कि वह जेल के भीतर से भी चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने की गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। जमानत दिए जाने पर वह महत्वपूर्ण साक्ष्यों से भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। हार्दिक के वकील लोखंडवाला ने बताया कि वह अदालत के फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं पर सरसरी तौर पर ऐसा लगता है कि अदालत ने क्राइम ब्रांच की आपत्ति को स्वीकार करते हुए उनके मुवक्किल की जमानत अर्जी खारिज की है।

हार्दिक अपने एक समर्थक को पुलिस वालों को मारने की सलाह देने के कारण सूरत के अमरोली थाने में दर्ज राजद्रोह के एक अन्य मामले में वहां लाजपुर सेंटल जेल में बंद है और उस मामले में उनकी जमानत अर्जी पर वहां की प्रधान जिला न्यायाधीश गीता गोपी की अदालत 11 मार्च को सुनवाई करेगी। पटेल आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई व्यापक हिंसा, जिसमें एक पुलिसकर्मी समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी तथा 44 करोड़ से अधिक की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ था, से संबंधित राजद्रोह के मामले में गत 18 जनवरी को अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 2700 पन्ने का आरोप पत्र दायर किया गया था। इसके बाद 22 जनवरी को हार्दिक ने जमानत अर्जी दी थी। क्राइम ब्रांच के हलफनामे में कहा गया है कि इस संवेदनशील मामले की जांच पड़ताल अब भी जारी है और इसमें और साक्ष्य मिलने की पूरी संभावना है पर अगर हार्दिक को रिहा किया गया तो वह महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। उधर, सूरत में गत तीन अक्टूबर को आत्महत्या की धमकी देने वाले अपने एक समर्थक (मामले का एक सहआरोपी) को ऐसा नहीं कर पुलिसवालों को मारने का उकसाउ सुझाव देने के कारण दर्ज राजद्रोह के मामले के दो सह आरोपियों की जमानत अर्जी वहां की अदालत ने पहले ही खारिज कर दी है।

इस मामले में गत आठ जनवरी को आरोप पत्र दायर हुआ था। उल्लेखनीय है कि हार्दिक सूरत के लाजपुर सेंट्रल जेल में तथा अहमदाबाद में दायर राजद्रोह मामले के उक्त तीनो आरोपी यहां साबरमती जेल में बंद है।