मनोहर पर्रिकर ने नए सेना प्रमुख की नियुक्ति पर कहा, वरिष्ठ ही चुनना था तो रक्षा मंत्री का क्या काम

नई दिल्ली ( 4 जनवरी ): दो वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज कर बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाए जाने के सरकार के फैसले का रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि अगर वरिष्ठता पर फैसला करना होता तो रक्षा मंत्री का क्या काम होता, यह काम तो कंप्यूटर का होता। इस बीच सरकार ने संकेत दिया है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद अमेरिका की तर्ज पर नहीं होगा।

रक्षा मंत्री ने मंगलवार को यह बातें नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहीं, जब वह कैंट इलाकों में स्वच्छता पखवाड़े की उपलब्धियों की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने आर्मी चीफ के चयन पर उठे विवाद को शांत करने की कोशिश की। उनसे पूछा गया कि क्या सरकार ने वरिष्ठता के सिद्धांत पर अमल छोड़ दिया है? पर्रिकर ने कहा कि वरिष्ठता का सिद्धांत कहां से आया। आर्मी चीफ चुनने के लिए के लिए प्रक्रिया बनी हुई है, जहां सारे कमांडरों को परखा जाता है। हालात के आधार पर फैसला किया जाता है। प्रक्रिया कहीं नहीं कहती है कि वरिष्ठता नियम है। अगर इस तरह से फैसला होता तो किसी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती, किसी रक्षा मंत्री की जरूरत नहीं होती, कैबिनेट की किसी समिति से मंजूरी की जरूरत नहीं होती। यह कंप्यूटर का काम होता। जन्म की तारीख पर फैसला हो जाता। आखिर क्यों फैसला लेने में 4-5 महीने लगते हैं?

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि मैं यह आश्वस्त कर सकता हूं कि प्रक्रिया के दायरे में आए सारे अधिकारी अच्छे थे और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया है।