'हर साल 10 हजार भारतीय छात्रों को PHD करने के लिए भेजें अमेरिका'

 

नई दिल्ली(30 जनवरी): देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस के सह संस्थापक एन.आर.नारायणमूर्ति ने कहा है कि हर साल 10,000 भारतीय छात्रों को अमेरिका में विज्ञान, टेक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) के अहम क्षेत्र में पीएचडी करने के लिए भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत और अमेरिका को करार करना चाहिए और यह चीज अगले 50 सालों तक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पर हर साल करीब 330 अरब रुपये का खर्च होगा जो इससे होने वाले फायदे की तुलना में बहुत ही कम होगा। ये छात्र भारत के विभिन्न सेक्टरों की समस्या के लिए अभिनव हल तैयार करेंगे।

.नारायणमूर्ति ने कहा कि करार में इस बात का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि छात्रों को पीएचडी पूरा करने के बाद अमेरिका में रोजगार नहीं मिलना चाहिए। उनको भारत में वापस आने और कम से कम 10 सालों तक अपनी सेवा प्रदान करने के लिए अनुबंध होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस प्रबंध से अमेरिका को भी फायदा पहुंचेगा। समस्याओं पर काम करने वाले भारतीय छात्रों की एक बड़ी संख्या होगी जो अमेरिका शिक्षाविदों के मूल्य को बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत हर साल अमेरिका के सैकड़ों ग्रैजुएट छात्रों को 10 साल का मल्टिपल एंट्री वीजा देता है।

उन्होंने कहा कि इस रणनीति का मकसद उभरते क्षेत्र जैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में हल विकसित करने में भारतीय और अमेरिकी शिक्षाविद के बीच सहयोग बढ़ेगा जहां डिवाइसेज एक-दूसरे से बात करेंगे और आपके फोन से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत को न सिर्फ अमेरिकी कंपनियों बल्कि अमेरिकी कंपनियों के ग्राहकों के लिए भी आईओटी में अडवांस्ड सॉफ्टवेयर विकसित करके अमेरिकी कंपनियों के मूल्य वृद्धि में पार्टनर बनना होगा। इसके लिए हमें अपने युवाओं को अडैप्टिव कंट्रोल और ऐनालॉग टू डिजिटल और डिजिटल टू ऐनालॉग फ्रेमवर्क और डिजिटल डिवाइसेज में प्रशिक्षण देना होगा। उनको बताना होगा कि कोड को कैसे लिखा और अधिकतम किया जए चूंकि इन ऐप्लिकेशंस में रिस्पॉन्स टाइम की काफी अहमियत होती है।

उन्होंने ने यह भी कहा कि भारत में विदेशी यूनिवर्सिटियों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए कुछ खास नहीं किया गया। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विदेशी यूनिवर्सिटियों के लिए भारत को खोलना चाहा था लेकिन कुछ कारणों से हम आगे प्रगति नहीं कर सके।