सेल्फी लेना बनी बीमारी, इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे लोग

नई दिल्ली ( 11 जनवरी ): सेल्फी लेने के शौकीन तो सभी है, लेकिन कुछ हर वक्त अपनी सेल्फी लेते रहते हैं। सेल्फी अब बीमारी बन चुकी है, क्योंकि ऐसा ही मामला दिल्ली के अस्पतालों में देखने को मिल रहा है। सेल्फी की वजह से होने वाली एक बीमारी के पेशंट दिल्ली के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर नाम की बीमारी से पीड़ित तीन ऐसे मरीजों की पहचान एम्स में हुई है।

गंगाराम अस्पताल में तो हर महीने चार-पांच ऐसे टीनेजर्स इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें सेल्फी से जुड़ी बीमारी देखी जा रही है। शहरों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। बॉडी इमेज को बेहतर दिखाने की यह लत ज्यादातर लड़कियों में देखी जा रही है। इस लत को अभी तक लोग बीमारी के रूप में नहीं देख रहे हैं। इंटरनैशनल स्टडी के अनुसार 60 पर्सेंट महिलाएं इससे अनजान होती हैं।

एम्स के सायकायट्री डिपार्टमेंट के डॉ. नंद कुमार के मुताबिक कि यह सच है कि हाल में तीन ऐसी लड़कियों का इलाज एम्स में हुआ है, जिसमें सेल्फीसाइटिस की प्रॉब्लम देखी गई थी। 

सेल्फीसाइटिस एक ऐसी कंडीशन होती है, जब इंसान अगर कोई सेल्फी नहीं ले या उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करे तो उसे बेचैनी होने लगती है। इसे ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर कहा जाता है। नहीं चाहते हुए भी लोग सेल्फी से खुद को रोक नहीं पाते हैं। जरूरत से ज्यादा सेल्फी लेने की चाहत बॉडी में डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर नाम की बीमारी को भी जन्म देती है।

इस बीमारी से लोगों को लगने लगता है कि वे अच्छे नहीं दिखते हैं। माना जाता है कि सेल्फी के दौर ने कॉस्मेटिक सर्जरी कराने वालों की संख्या बढ़ा दी है। जब एक इंसान को अपने रोज के काम में कोई एक आदत बाधा डालने लगे तो समझ में आता है कि वह ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर का शिकार है। पढ़ने वाले को पढ़ाई में मन नहीं लगे, काम वाले को काम में मन नहीं लगे, तो यह बीमारी की शुरुआत है। अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह बढ़ती जाती है।