सीमाओं की सुरक्षा हमारा काम, नहीं दें निर्देश: रोहिंग्या मामले पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

नई दिल्ली ( 17 मार्च ): अवैध रूप से भारत के विभिन्न राज्यों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा देश की सीमाओं की सुरक्षा अनिवार्य तौर पर कार्यपालिका का काम है। इसके साथ ही अदालत से आग्रह किया कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को विदेशियों को गैर-कानूनी रूप से प्रवेश का निर्देश नहीं दे। दो रोहिंग्या शरणार्थियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह कानून के अनुसार सीमाओं की सुरक्षा कर रहा है और व्यापक‘ राष्ट्रीय हित’ में मानवाधिकारों का भी पालन कर रहा है। 

आवेदन में सीमा सुरक्षा बल को शरणार्थियों को प्रवेश से रोकने के लिए कथित तौर पर‘ मिर्ची और स्टन ग्रेनेड’ के इस्तेमाल से रोकने का आग्रह भी किया गया है। मंत्रालय के हलफनामे में कहा गया है कि कानून के अनुसार किसी भी संप्रभु देश की सीमाओं की सुरक्षा अनिवार्य तौर पर कार्यपालिका का कार्य है और न्यायालय को विदेशियों के भारत के सीमा क्षेत्र में प्रवेश को लेकर केंद्र के साथ-साथ साझा सीमा वाले राज्य सरकारों को रिट निर्देश नहीं देना चाहिए।

गृह मंत्रालय ने शरणार्थियों को वापस भेजने के लिए मिर्च और स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘झूठा, गलत और सत्य से परे है। रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर भारत पहले ही अपना मत स्पष्ट कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिन रोहिंग्या शरणार्थियों को भागकर बांग्लादेश आना पड़ा है, उन्हें म्यांमार को वापस बुलाना चाहिए जहां से वे विस्थापित किए गए हैं।