''धर्म-निरपेक्षता' का खराब शब्द के रूप में किया जा रहा है इस्तेमाल'

नई दिल्ली (23 जनवरी): नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि लोगों में यह धारणा बन रही है कि देश सांप्रदायिक आधार पर बंट रहा है। प्रो़फेसर सेन ने शनिवार को कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ऐसी स्थिति बन गई है, जहां धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल खराब शब्द के रूप में किया जा रहा। इसके बाद 'लोकतंत्र' और 'आजादी' का भी इसी तरह इस्तेमाल शब्द हो सकता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अमर्त्य सेन ने कहा, ''देश में मौजूदा समय में सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने की परिस्थितियां पैदा की जा रही है। धर्मनिरपेक्षता शब्द का इस्तेमाल खराब शब्द के रूप में किया जा रहा है। यह काफी विचित्र है।'' उन्होंने कहा, ''मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं जब लोकतंत्र और आजादी का खराब शब्द के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। मुझे नहीं लगता कि स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने समानता और न्याय की मांग पर ज्यादा विचार किया और मेरा मानना है कि मौजूदा सरकार इस संबंध में काफी कम काम कर रही है।''

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की परिस्थितियों पर उन्होंने कहा, "इस पर ओछी मानसिकता की राजनीति की जा रही है, जो हमें बोस की दूरदृष्टि से हटा रही है।" नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों के सार्वजनिक होने पर प्रो सेन ने कहा, "इसके पीछे मंशा यह सामने आ रही है कि सुभाष चंद्र बोस की ङ्क्षजदगी के आखिरी दिनों में कांग्रेस की विशेष भूमिका थी। हमें समानता, न्याय, शिक्षा और सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरुरत है, जैसा कि सुभाष चंद्र बोस महसूस करते थे। आज के समय में भी ये चीजें काफी महत्वपूर्ण है।"