यह है सीएसटी का खुफिया तहखाना, जहां रेलवे रखता है कमाई...

अविनाश पांडेय, मुंबई (27 जुलाई): सीएसटी की विश्व विरासत के नीचे दबी हुई है एक पुरानी दुनिया। ये जगह आपको अंग्रेज़ो के ज़माने में ले चलेगी। एक काला मोटा दरवाजा जो खोलने पर बजता है, उसके पीछे 23 सर्पिल सीढियां जो आपको सीधे उस ख़ुफ़िया जगह तक ले जाती है। उन सीढ़ियों के खत्म होते ही एक मजबूत लोहे की पोर्टलों के दर्शन होते है। इन लोहे की पोर्टलों को कभी-कभार ही खोला जाता है, क्योंकि वो इतने वजनदार है कि उसे खोलने के लिए करीब 4 लोगों की जरूरत पड़ती है।

इसी के बाद आता है वो गुप्त तहखाना। ये तहखाना उस समय सेंट्रल रेलवे द्वारा उपयोग में आता था। सेंट्रल रेलवे अपनी रोजाना की कमाई को इस जगह पर महफूज रखती थी। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बेसमेंट में दबी हुई, इस ख़ुफ़िया जगह को सेंट्रल रेलवे फिर एक बार उपयोग में लाना चाहती है। ख़ास तरह की चाभियों का इस्तेमाल कर उस दरवाजे को खोला जाता है।

1890 के पहले निर्माण किए गए इस गुप्त तहखाना को सेंट्रल रेलवे अपनी रोजाना की कमाई रखने के लिए इस्तेमाल करती थी। सभी स्टेशनों के टिकट काउंटर्स की कमाई को यहां लाया जाता था और रखा जाता था। फिर कुछ दिनों के बाद इस कमाई को बैंक में भेज दिया जाता था। 15 साल पहले तक यानि 2003 इसका इस्तेमाल हुआ, फिर उसके बाद इस गुप्त तहखाने का उपयोग बंद कर दिया गया। क्योंकि आरबीआई ने सीधे कैश लेना बंद कर दिया। उसके बाद से इन पैसों को अलग-अलग बैंकों में जमा किया जाना शुरू हुआ।

इसके अंदर कई बड़े और वजनदार तिजोरियां थी, जिसमे से 44 ने तो कई दशक देखे है। ये तिजोरियां इतनी मजबूत है कि इसे उठाना एक इंसान के बस की बात नही। 1967 तक इन तिजोरियों को रस्सियों के जरिए खिंचा जाता था, फिर उसके बाद ये काम बिजलियों के जरिये किया जाने लगा।  इस गुप्त तहखाने को इस तरह से बनाया गया है कि इसमें हवा और कुदरती रौशनी का भी आगमन होता है।  ये तहखाना अपने साथ कई इतिहास की कहानियां जोड़े रखता है। फिलहाल ये तहखाना वीरान पड़ा हुआ है।