वैज्ञानिकों ने पकड़े एलियंस के भेजे संदेश !

नई दिल्ली (6 जनवरी): इस बार किसी एलियन हण्टर ने नहीं बल्कि वैज्ञानिकों ने कहा है कि कहीं दूर अंतरिक्ष से एलियंस पृथ्वी पर रहन वाले हम लोगों के लिए रेडियो तरंगों के माध्यम से संदेश भेज रहे हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि जहां से ये रेडियो तरंगें आ रही हैं वहां हमारे जैसे ही लोग हो सकते हैं। इन रेडियो तरंगों का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा  है कि दूर अंतरिक्ष से आने वाली ये रेडियो तरंगें बहुत ज्यादा ऊर्जा से भरी होती हैं, लेकिन इनकी उम्र बहुत कम होती है। कुछ मिलिसेकंड में ये तरंगें खत्म हो जाती हैं। इसके बारे में पहली बार साल 2007 में पता चला था। सेकंड के कुछ हिस्से तक जिंदा रहने वाली ये तरंगें इतने कम समय में भी इतनी ऊर्जा पैदा करती हैं, जितनी ऊर्जा पैदा करने में सूर्य को 10,000 साल लग जाएंगे। अब तक 17  रेडियो तरंगों की पहचान हो चुकी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आसमान में हर साल 10 सेकंड के अंतराल पर कहीं न कहीं ये रेडियो तरंगें पैदा होती हैं।

हाल के दिनों में हुए एक शोध में इन अद्भुत रेडियो तरंगों के बारे में एक बड़ी दिलचस्प जानकारी मिली है।  रेडियो तरंगों पर हो रहे शोध में ऐसी ही एक तरंग का जब अध्ययन किया गया, तो पता चला कि वह धरती से अरबों प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक छोटी सी आकाशगंगा से  आ रही हैं। यह उस आकाशगंगा में जीवन की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। ऐसा हो सकता है कि वहां हम इंसानों की ही तरह, या फिर हमसे अलग कोई ऐलियन जीवन मौजूद हो। इसे सबसे पहले साल 2012 में पुअर्टो रिको में स्थित अरसेबो वेधशाला के खगोलशास्त्रियों ने देखा था। पिछले 4 सालों में ऐसी झिलमिलाहट भरी रेडियो तरंगें कई बार दिखाई दी हैं। 6 महीने तक इनका अध्ययन करने के बाद अब वैज्ञानिक आकाश में इसकी स्थिति की सटीक जानकारी दे सकते हैं।

मॉन्ट्रिऑल स्थित मगिल यूनिवर्सिटी की टीम के सदस्य डॉक्टर श्रीहर्ष तेंदुलकर ने बताया, रेडियो तरंगों की धरती से कितनी दूरी है, इसकी जानकारी मिलने से पहले उनकी उत्पत्ति के बारे में कई बातें कही गईं। कहा गया कि उनके हमारे नजदीक के या फिर हमारी ही आकाशगंगा से आने की संभावना है। अब विस्तृत अध्ययन के बाद हमने इन बातों को खारिज कर दिया है।' अमेरिका के नैशनल सायेंस फाउंडेशन द्वारा संचालित एक मल्टी-ऐंटेना वाले रेडियो टेलिस्कोप से अध्ययन करने के बाद अब पुख्ता तौर पर बताया जा सकता है कि  रेडियो तरंगें कहां से आ रही थी। जहां से यह रेडियो तरंग आई, वह धरती से 3 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक बौनी आकाशगंगा है।