मलबे से बदल रहा गंगा का जलमार्ग !

नई दिल्ली(17 अक्टूबर): पहाड़ों पर भूस्खलन की वजह से गिरे मलबे के कारण उत्तरकाशी स्थित गंगोत्री के गोमुख मार्ग में गंगा नदी का जलमार्ग प्रभावित हो रहा है। यह चौंकाने वाला तथ्य हाल ही में गंगोत्री से गोमुख तक पर्यावरणविद और वैज्ञानिकों द्वारा की गई पदयात्रा के दौरान सामने आया। 

- इस दौरान पाया गया कि 13,200 फीट (4,023 मी) में स्थित ग्लेशियर में न केवल दरारें पाई गई हैं बल्कि यहां झीलनुमा ढांचा भी बन गया है। यहीं से गंगा का उद्गम होता है।

- वैज्ञानिकों ने इस दौरान पाया कि झील के निर्माण के कारण अब नदी का बहाव ग्लेशियर के बाईं तरफ से होता है जबकि पहले यह सीधी बहती थी। अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक नवीन जुयाल ने बताया कि यदि गंगा इसी तरफ अपने बदले हुए जलमार्ग से बहती रही तो इससे गोमुख के एक बड़े हिस्से का सफाया हो सकता है।

- नवीन 11 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक हुई इस पदयात्रा के 61 सदस्यों में से एक थे। वह आगे बताते हैं कि ग्लेशियर से निकलने वाली सहायक नदी की एक धारा जुलाई में भारी बारिश की वजह से शायद अवरुद्ध हो गई है। बंद पड़ी धारा के विच्छेदन से यहां भारी मात्रा में पैराग्लेशियल मलबा निकल रहा है और इसी वजह से नदी का जलमार्ग प्रभावित हो गया है। 

- नवीन आगे कहते हैं कि यदि ग्लेशियर लगातार यूं ही पिघलता रहेगा और पानी लगातार पैराग्लेशियल मलबे को छूता हुआ बहता रहेगा तो इससे ग्लेशियर के एक बड़े भाग के खत्म होने की संभावना है। 

- 1970 के दशक के हर साल गोमुख आने वाले गुलाब सिंह नेगी की खींची हुई फोटो में गोमुख की उपस्थिति में भारी बदलाव दिख रहा है। न केवल तस्वीरें बल्कि ग्लेशियर में दरारें साफ बयां कर रही हैं कि पास के पहाड़ों से निकलने वाले मलबे की वजह से गंगा के उद्गम स्थान में बदलाव हुआ है। नेगी कहते हैं कि इस मलबे को जल्द से जल्द हटाकर गंगा के जल प्रवाह को फिर से सामान्य किया जा सकता है।