चंद्रयान 2 से पहले भी ISRO इसरो लिख चुका है सफलता की कई कहानियां, देखिए कौन-कौन

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जुलाई): भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अपने सबसे दमदार रॉकेट जीएसएलवी की मदद से चांद पर एक बार फिर तिरंगा फहराने के लिए तैयार है। चंद्रयान 2 के साथ इसरो आज एकबार फिर सफलता की एक और कहानी लिखने को तैयार है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का जीएसएलवी रॉकेट एक लैंडर, रोवर और एक ऑर्बिटर के साथ चंद्रमा पर फतह के लिए उड़ान भरेगा। सितंबर में भारत के रोवर के चंद्रमा के उस हिस्से पर उतरने की योजना है जो अब भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्यों का केंद्र बना हुआ है। यह चांद का दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र है जहां अक्सर अंधेरा छाया रहता है। चंद्रयान दो से पहले इसरो सफलता की कई इबारतें लिख चुका है। भारतीय स्पेस एजेंसी ने ऐसे कई अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम दिया है जिनके बारे में जानकर दुनिया हैरान रह गई और भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया।

1- आर्यभट्ट उपग्रह-  यह भारत का पहला सैटेलाइट था, जिसे सोवियत रूस के रॉकेट की मदद से सन 1975 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह इसरो की शुरुआती सफलताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।isro

2- चंद्रयान 1-  साल 2008 में इसरो ने चंद्रयान 1 मिशन को लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत चांद के चारों ओर चक्कर लगाने वाला एक आर्बिटर भेजा गया था, जिसने चांद की अहम तस्वीरें ली थीं और इसी मिशन की मदद से इसरो ने दुनिया के सामने चंद्रमा पर पानी और वर्फ के भंडार होने की पुष्टि की थी। जिस पर बाद में नासा ने भी सहमति जताई थी।isro

3-  मंगलयान - इस अंतरिक्ष मिशन ने इसरो की ऐसी धाक जमा दी, जिसके बाद दुनिया में कोई भी भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की काबिलियत और क्षमता को नजरअंदाज नहीं कर सकता था। भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने पहले प्रयास में मंगल ग्रह तक अपना यान (आर्बिटर) सफलतापूर्वक पहुंचा दिया। भारत, नासा, रूस  और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अलावा अब तक मंगल ग्रह तक कोई नहीं पहुंच पाया और पहले प्रयास में मंगल तक पहुंचने में सिर्फ भारत को सफलता मिली है।

isro4-  एक बार में 104 सैटेलाइट भेजने का वर्ल्ड रिकॉर्ड-  इसरो के नाम एक बार में सबसे ज्यादा उपग्रह यानी सैटेलाइट अंंतरिक्ष में भेजने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने पीएसएलवी रॉकेट की मदद से दुनिया के अलग अलग देशों के 104 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे थे।

5-  बाहुबली रॉकेट, जीएसएलवी मार्क 3- ये वही रॉकेट है जिसकी मदद से चंद्रयान 2 को लॉन्च किया जा रहा है। यह भारत का अब तक का सबसे क्षमतावान रॉकेट है। साल 2014 में इसरो ने इस रॉकेट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था।

6-  इंडियन नेशनल सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS)- कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत को अपना जीपीएस देने से इनकार कर दिया। भारत पहाड़ों पर पाकिस्तानी ठिकानों की जानकारी के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहता था। अमेरिका के मना करने के बाद भारत ने अपना जीपीएस विकसित करने की ठानी और यहां से शुरु हुआ आरएनएसएस के विकास का सफर। यह सिस्टम निकट भविष्य में जल्द तैयार होने की उम्मीद है।

7-  रीयूजेबल लॉन्ज व्हीकल (RLV)- इसरो ने एक ऐसा यान विकसित करने और उसका सफल परीक्षण करने में सफलता पाई है जो अंतरिक्ष में जाकर सुरक्षित वापस धरती पर आ सकता है। भविष्य में इस व्हीकल की मदद से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के अंतरिक्ष में जाकर वापस धरती पर लौटने का रास्ता खुलेगा। रीयूजेबल लॉन्ज व्हीकल को इस तरह बनाया गया है कि इसका इस्तेमाल बार बार अंतरिक्ष मिशनों में किया जा सके।