कल्पना नहीं एक हकीकत है 'रामसेतु', विदेशी वैज्ञानिकों ने दिया ये बड़ा सबूत

नई दिल्ली ( 13 दिसंबर): रामसेतु के अस्तित्व को लेकर भारत में अक्सर बहस होती रहती है। हिंदूवादी संगठन दावा करते हैं कि यह वही रामसेतु है, जिसका जिक्र रामायण और रामचरितमानस में है, लेकिन एक पक्ष ऐसा भी है जो इसे केवल एक मिथ या कल्पना करार देता है। लेकिन भूगर्भ वैज्ञानिकों, आर्कियोलाजिस्ट की टीम ने सैटेलाइट से प्राप्त चित्रों और सेतु स्थल के पत्थरों और बालू का अध्ययन करने के बाद यह पाया है कि भारत और श्रीलंका के बीच एक सेतु का निर्माण किए जाने के संकेत मिलते हैं। वैज्ञानिक इसको एक सुपर ह्यूमन एचीवमेंट मान रहे हैं। 

एक साइंस चैनल ने तथ्यों के साथ दावा किया है कि रामसेतु पूरी तरह कोरी कल्पना नहीं हो सकता है, क्योंकि इस बात के प्रमाण हैं कि भारत और श्रीलंका के बीच स्थित इस बलुई रेखा पर मौजूद पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं। साइंस चैनल ने सोमवार को एक वीडियो ट्विटर पर डाला। वीडियो में कुछ भूविज्ञानियों और वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि रामसेतु पर पाए जाने वाले पत्थर बिल्कुल अलग और बेहद प्राचीन हैं।

भूविज्ञानी ऐलन लेस्टर के मुताबिक, 'हिंदू धर्म में भगवान राम द्वारा ऐसे ही एक सेतु के निर्माण का जिक्र है। इस पर शोध करने पर पता चला कि बलुई धरातल पर मौजूद ये पत्थर कहीं और से लाए गए हैं।' हालांकि ये पत्थर कहां से और कैसे आए, यह आज भी एक रहस्य है। 

पुरातत्वविद चेल्सी रोज़ कहती हैं, 'जब हमने इन पत्थरों की उम्र पता की, तो पता चला कि ये पत्थर उस बलुई धरातल से कहीं ज्यादा पुराने हैं, जिस पर ये मौजूद हैं।' ये पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं, वहीं जिस बलुई धरातल पर ये मौजूद हैं वह महज 4000 साल पुराना है। 

चैनल का दावा है कि इस स्टडी से स्पष्ट होता है यह ढांचा प्राकृतिक तो नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा बनाया गया है। चैनल के मुताबिक, कई इतिहासकार मानते हैं कि इसे करीब 5000 साल पहले बनाया गया होगा और अगर ऐसा है, तो उस समय ऐसा कर पाना सामान्य मनुष्य के लिहाज से बहुत बड़ी बात है।