शुद्ध और सुगंधित धूप से मिलती है पितरों को मुक्ति... !

नई दिल्ली (18 सितंबर):शास्त्रों के अनुसार यदि पितृ पक्ष में यदि शुद्ध और सुगंधित धूप का दर्शन पितरों को कराया जाये तो उनकी मुक्ति की राह आसान हो जाती है। शुद्ध और सुगंधित धूप के विषय में तंत्रसार में लिखा है कि अगर, तगर, शैलज, शर्करा, नागरमाथा, चंदन, इलाइची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गुल ये सोलह प्रकार के धूप माने गए हैं। इसे षोडशांग धूप कहते हैं।

मदरत्न के अनुसार चंदन, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी, लघु और क्षौद्र सभी को समान मात्रा में मिलाकर जलाने से उत्तम धूप बनती है। इसे दशांग धूप कहते हैं। इन दोनों प्रकार में से कोई एक प्रकार की धूप तैयार कर पितरों को दर्शन-तर्पण करना चाहिए।