ये हैं वो दरिंदे जिसने देश की बेटी के साथ की थी हैवानियात


नई दिल्ली  (5 मई): निर्भया के गुनहगार को फांसी की सजा मिलेगी। सुप्रीम को ने चारों दोषियों की फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के चारों हत्यारों की फांसी की सजा बरकरार रखी। निर्भया के कुल 6 गुनहगार थे। इनमें से एक ने जेल में खुदकुशी कर ली थी। जबकि दूसरा उम्र के चलते बच गया। वहीं 4 दोषियों को फांसी की होगी।


आपको बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात वहशीपन की सारी हदें पार कर दी थीं। छह दरिंदे ने पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया को अपनी हवस का शिकार बनाया। इस मामले में कुल 6 लोग आरोपी थे।

- बस ड्राइवर राम सिंह इस वारदात में मुख्यआरोपी था। जिस चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप हुआ, उस बस को राम सिंह ही चला रहा था।  राम सिंह ने गैंगरेप करने के साथ ही निर्भया और उसके दोस्त को लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा था। घटना के महज कुछ घंटों बाद पुलिस ने राम सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। 11 मार्च, 2013 को राम सिंह ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी।


- इस वारदात का दूसरा मुख्य अभियुक्त बस का क्लीन मुकेश था। जिस रात बस में गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह भी बस में सवार था। गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था। मुकेश सिंह अभी तिहाड़ जेल में बंद है।


- तीसरा मुख्य आरोपी पेशे से फिटनेस ट्रेनर विनय था। जब इसके पांचों साथी निर्भया के साथ गैंगरेप कर रहे थे तो यह बस चला रहा था। अन्य दोषियों के साथ विनय तिहाड़ जेल में कैद है और वह यूनिवर्सिटी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। विनय ने पिछले साल जेल के भीतर खुदकुशी की कोशिश की थी लेकिन वह बच गया।


- वहीं चौथा आरोपी फल बेचने का काम करने वाला पवन गुप्ता था। 16 दिसंबर को गैंगरेप के समय यह भी अपने दोस्तों के साथ उस बस में मौजूद था। फिलहाल पवन गुप्ता भी तिहाड़ जेल नंबर दो में अन्य दोषियों के साथ बंद है। पवन भी जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है।


- पांचवा आरोपी अक्षय ठाकुर था। इसकी दोस्ती बस राम सिंह से थी। तिहाड़ जेल में कैद अक्षय ठाकुर ने जेल में अपनी जान को खतरा बताया था. जिसके बाद इसकी सुरक्षा को और ज्यादा चाक-चौबंद कर दिया गया।


- गैंगरेप का छठा आरोपी एक नाबालिग है। इसीने निर्भया को बस में चढ़ाया था। घटना के वक्‍त वह नाबालिग था। लिहाजा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 3 साल की अधिकतम सजा के साथ उसे सुधार केंद्र में भेजा था। दिसंबर, 2015 में सजा पूरी करने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। बताया जा रहा है कि गैंगरेप के दौरान निर्भया से सबसे ज्यादा दरिंदगी इसी नाबालिग ने की थी।


निर्भया के सभी 6 गुनहगारों के खिलाफ बलात्‍कार, अपहरण और हत्‍या का मामला दर्ज हुआ। फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में मामला चला। 13 सितंबर, 2013 को चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई और नाबालिग को तीन साल की अधिकतम सजा के साथ सुधार केंद्र में भेज दिया गया। 13 मार्च, 2014 को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। आज यानी 5 मई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी चारों दरिंदों के फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी।