300 करोड़ के सोने की खोज का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (13 अप्रैल): असम में दो साल पहले रहस्यमय हालात में गायब हुए 300 करोड़ रुपये के सोने को खोजने की मांग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस खजाने का पता लगाने व इसे गायब करने में शामिल लोगों पर कार्रवाई कर मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने उक्‍त याचिका पर सुनवाई करते केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई 6 मई को होगी। सुप्रीम कोर्ट में खुफिया विभाग के अधिकारी रहे मनोज कौशल की ओर से यह याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह करीब दो साल पहले असम में तैनात था। बोडो उग्रवादी अक्सर वहां के व्यापारियों इत्यादि से रुपयों की उगाही करते रहे हैं। इन उग्रवादियों को देने के लिए करीब ढाई साल पहले वर्ष 2014 में असम टी आनर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष भट्टाचार्य द्वारा 300 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे।

यह राशि उग्रवादियों को सोना के रूप में दी जानी थी। उग्रवादियों की मांग के अनुसार राशि को सोने में कनवर्ट कर 300 करोड़ के सोने के साथ कुछ एके-47 राइफल इत्‍यादि के साथ असम के ही एक चाय के बागान में जमीन के नीचे छिपा दिया गया। जिससे कि समय आने पर यह सोना बोड़ो उग्रवादियों को दिया जा सके। इसकी जानकारी केवल भट्टाचार्य को थी। भट्टाचार्य और उनके परिवार के लोगों की वर्ष 2014 में ही संदिग्ध परिस्थितियों में अज्ञात लोगों द्वारा हत्‍या कर दी गई।

याचिकाकर्ता मनोज कौशल ने बताया कि उन्‍होंने भट्टाचार्य हत्‍याकांड की जांच की तो उन्‍हें वह जगह मिल गई, जहां पर बोडो उग्रवादियों के लिए 300 करोड़ रुपये का सोना छिपाया गया था। खुफिया विभाग का अधिकारी होने के नाते उन्‍होंने यह सूचना सेना अधिकारियों को दी। सेना अधिकारियों ने तय किया कि वह 1 जून 2014 को उक्‍त जगह से खुदाई कर सोना निकाल लेंगे। मगर कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते यह सूचना लीक हो गई।

जिसके चलते कुछ अज्ञात लोगों ने 30 मई की रात को ही उक्‍त जगह पर खुदाई कर 300 करोड़ रुपये का सोना और हथियार चुरा लिये। उन्‍होंने इस मामले में शामिल अधिकारियों की जांच व उन पर कार्रवाई के लिए विभिन्‍न आला अधिकारियों को शिकायत की, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लिहाजा, उसे अदालत की शरण लेनी पड़ रही है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि इस पूरे प्रकरण की उच्‍च स्‍तरीय जांच कराई जाए और जानकारी को लीक कराने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सोना निकालने वाले लोगों और गायब सोने का पता लगाकर उसे भारत सरकार के खजाने में जमा कराया जाए।