न्यायपालिका में एससी-एसटी को आरक्षण देने की तैयारी में मोदी सरकार


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (26 दिसंबर): केंद्र सरकार न्यायपालिका में भी एससी और एसटी को आरक्षण देना चाहती है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नेशनल ज्यूडिशियल अपाइंटमेंट कमीशन के गठन को असंवैधानिक बताने पर ऐतराज जताते हुए कहा है कि  सरकार जजों की नियुक्ति के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के पक्ष में हैं। सरकार न्यायपालिका में अनुसूचित जाति, जनजाति को आरक्षण देना चाहती है। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 15वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एनजेएसी पर हमने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को माना लेकिन इस पर हमारा मतभेद है। एनजेएसी एक्ट हमने संसद में पारित किया। 50 फीसदी से ज्यादा राज्यों ने मंजूरी दी।

साथ ही केंद्रीय रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न्यायिक सेवा की वजह से हमारे लॉ स्कूलों के टैलंट भी अडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के लेवल पर जूडिशल ऑफिसर के रूप में सामने आएंगे। एडीजे और डिस्ट्रिक्ट जजों के रूप में वे हमारी न्यायिक व्यवस्था को और अधिक तेज व कुशल बनाने में मदद कर सकते हैं।

आपको बता दें कि सरकार ने जजों की नियुक्ति और तबादलों के लिए एनजेएसी एक्ट बनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था। रविशंकर प्रसाद का कहना है कि उनकी सरकार में उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति सबसे ज्यादा हुई है। 2016 में उच्च न्यायलय में 126 जज, 2017 में 115 और 2018 में अब तक 108 जज नियुक्त किए जा चुके हैं। वहीं सुनवाई की सुविधा पर रविशंकर ने कहा कि 488 अदालत और 342 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों के 1754 आवास भी बनाए जा रहे हैं।