दहेज़ उत्पीड़न केस: तुरंत गिरफ्तारी पर रोक के फैसले की समीक्षा करेगा SC

नई दिल्ली ( 28 नवंबर ):  सुप्रीम कोर्ट ने बुद्धवार को कहा कि कोर्ट IPC के प्रावधानों से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। मुख्यन्यायाधीश की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने दहेज़ से जुड़े कानून  498(A) में बदलाव, जिसके तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगायी गयी है वह सही नहीं है।' कोर्ट ने कहा कि 498(A) IPC का प्रावधान है इसके लिए कोर्ट गाइडलाइन कैसे बना सकता है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जनवरी के तीसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा।

गौरतलब है की हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने दहेज कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए एक बड़ा फैसला सुनाते हुए दहेज़ उत्पीड़न के आरोप की पुष्टि होने तक आरोपियों की गिफ्तारी पर रोक लगा दिया था।

कोर्ट ने माना था कि कई पत्नियां आईपीसी की धारा 498(A) का दुरुपयोग करते हुए पति के माता-पिता, नाबालिग बच्चों, भाई-बहन और दादा-दादी समेत रिश्तेदारों पर भी आपराधिक केस कर देती हैं। जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने कहा कि अब समय आ गया है जब बेगुनाहों के मनवाधिकार का हनन करने वाले इस तरह के मामलों की जांच की जाए। 

कोर्ट ने इसके लिए गाइडलाइंस जारी किया था जिसके मुताबिक, हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति गठित की जाएगी और सेक्शन 498A के तहत की गई शिकायत को पहले समिति के समक्ष भेजा जाएगा। यह समिति आरोपों की पुष्टि के संबंध में एक रिपोर्ट भेजेगी, जिसके बाद ही गिरफ्तारी की जा सकेगी। बेंच ने यह भी कहा था कि आरोपों की पुष्टि से पहले NRI आरोपियों का पासपोर्ट भी जब्त नहीं किया जाए और ना ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो।

मामले में परिवार के सभी सदस्यों, खासकर जो बाहर रह रहे हों, उनका पेश होना भी आवश्यक नहीं होगा। हालांकि यह सभी निर्देश तब लागू नहीं होंगे जब महिला जख्मी हो या फिर उसकी प्रताड़ना की वजह से मौत हो जाए। कोर्ट ने कहा था कि कानूनी सेवा प्राधिकरण इस समिति का गठन करेगा जिसमें तीन सदस्य होंगे। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता, लीगल स्वयंसेवी और रिटायर व्यक्ति को शामिल किया जाएगा। समय-समय पर इसके कामकाज का आकलन जिला जज को करना होगा। कोर्ट के इस आदेश के बाद देश की तमाम महिला संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ़ विरोध जताया था।