अधिकारों की 'जंग' हारे #Kejriwal, LG हैं दिल्ली के 'BIG BOSS', जानिए कब-कब केजरीवाल सरकार को लगे बड़े झटके...

डॉ. संदीप कोहली, 

नई दिल्ली (9 सितंबर): कल दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, आज सुप्रीम कोर्ट की फटकार। LG से अधिकारों की जंग में हारे केजरीवाल। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोई राहत ना देते हुए साफ कर दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगेगी। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 अगस्त को दिए फैसले में कहा था कि राजधानी दिल्ली अभी भी केंद्र शासित प्रदेश है और संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत विशेष प्रावधान किया गया है इस तरह LG ही दिल्ली के प्रशासक हैं। LG की मर्जी के बिना केजरीवाल सरकार कानून नहीं बना सकती। 

आपको बता दें 4 अगस्त के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि दिल्ली सरकार की ओर से दायर सात याचिकाएं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जबाव मांगा है। इसके लिए केंद्र सरकार को 6 हफ्तों का समय दिया गया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी। इससे पहले गुरूवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को रद कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह नियुक्तियां LG की अनुमति के बिना की गई थी। इसलिए नियुक्तियां अवैध है। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने...

4 अगस्त को क्या कहा था दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में... - दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि LG ही दिल्ली के प्रशासक हैं। - LG की मर्जी के बिना दिल्ली सरकार कानून नहीं बना सकती। - 239 AA दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का स्पेशल स्टेटस देता है। - एलजी अरविंद केजरीवाल सरकार की सलाह मानने को बाध्य नहीं हैं।  - एलजी अपना स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं, दिल्ली में केंद्र का नोटिफिकेशन मान्य रहेगा। - दिल्ली सरकार को कोई भी नोटिफिकेशन जारी करने से पहले LG की मंजूरी लेनी होगी। - भूमि, लॉ एंड ऑर्डर और पुलिस केंद्र के अंडर। - ACB केंद्रीय कर्मचारियों पर कारवाई नहीं कर सकती।  - दिल्ली सरकार के दोनों मामलों में कमेटी बनाने के फैसले अवैध हैं।

केंद्र सरकार ने क्या दी दलील... - दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है और ये 239 AA के बाद भी केंद्र शासित प्रदेश है। - दिल्ली क्योंकि देश की राजधानी है लिहाज़ा इसको पूरे तौर पर राज्य सरकार के जिम्मे नहीं दिया जा सकता। - उपराज्यपाल और राज्यपाल में अंतर होता है, उपराज्यपाल केंद्र की सलाह लेकर ही काम करता है। - उपराज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर काम करते है जो की केंद्र की सलाह के साथ फैसले लेते हैं। - सीएम सिर्फ सलाह दे सकते हैं अंतिम फैसला उपराज्यपाल का ही होता है। - दिल्ली सरकार के मंत्रियों की सलाह मानना उपराज्यपाल के लिए ज़रूरी नहीं।

दिल्ली सरकार ने क्या दी दलील... - दिल्ली में जनता प्रतिनिधि को चुनती है, ऐसे में दिल्ली का असली बॉस सीएम ही हो सकता है। - दिल्ली सरकार का आरोप है कि हम कोई भी फैसला लेते हैं उपराज्यपाल उसे असंवैधानिक करार दे देते हैं। - ACB का कार्यक्षेत्र दिल्ली है लिहाजा वो दिल्ली सरकार के अधीन ही आता है। - LG नजीब जंग दिल्ली सरकार के कैबिनेट फैसले को मानने को बाध्य हैं।

अधिकारों की जंग... - संविधान के अनुच्छेद 239AA: भारत की यूनियन टैरिटरी में पुलिस, कानून व्यवस्था और जमीन से जुड़े मामलों में शक्ति केंद्र के पास है।  - संविधान के अनुच्छेद 131: केंद्र और राज्य के बीच किसी भी विवाद को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही सुलझाया जा सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट से लगे झटके... पहला झटका-30 अक्टूबर 2015- दिल्ली हाइकोर्ट ने दिया केजरीवाल को झटका, तीनों बिजली कंपनियों का CAG आडिट नहीं होगा दिल्ली हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने दिल्ली की बिजली कंपनियों के CAG आडिट के मामले में अपना फैसला सुनाया है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनवरी 2014 में तीनों बिजली कंपनियों BSES राजधानी, BSES यमुना और TATA पावर के सीएजी आडिट के आदेश दिए थे जिसके खिलाफ कंपनियों ने हाइकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।

दूसरा झटका-9 फरवरी 2016- दिल्ली हाईकोर्ट से केजरीवाल को झटका, चलता रहेगा मानहानि का मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को झटका दिया है, हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि केजरीवाल के खिलाफ दायर मानहानि का केस खारिज नहीं किया जाएगा, गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के याचिका के खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन फाइल किया था कि मानहानि केस को खारिज किया जाए।

तीसरा झटका-10 फरवरी 2016- दिल्ली हाईकोर्ट से केजरीवाल को झटका, सीबीआई नहीं देगी छापे में जब्त दस्तावेज दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस बात का अधिकार दिया कि वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर मारे गए छापे के दौरान जब्त दस्तावेजों को अपने पास रख सके। निचली अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया था कि वह छापे के दौरान जब्त दस्तावेजों को दिल्ली सरकार को लौटा दे।

सुप्रीम कोर्ट ने कब-कब लगाई फटकार... पहला झटका-22 फरवरी 2016- केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- हर मुद्दे पर कोर्ट आ जाते हो हरियाणा में जाट आरक्षण के चलते दिल्ली में चल रहे जल संकट पर केजरीवाल सरकार राहत की उम्मीद लेकर सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को लताड़ दिया. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा, 'आप अपने दफ्तर में बैठे रहते हैं, जबकि आपको हरियाणा सरकार से बात करके इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए था.' अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार हर मुद्दे पर अदालत पहुंच जाती है.

दूसरा झटका-13 मई 2016- सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को झटका, बना रहेगा आपराधिक मानहानि का कानून सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि कानून के खिलाफ दायर याचिका पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि के मुद्दे पर दंडात्मक कानूनों की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की और कहा कि हमने देशभर में मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी मानहानि की शिकायतों पर सम्मन जारी करते समय अत्यंत सावधानी बरतें। शीर्ष कोर्ट ने आईपीसी की धारा 499 और 500 को संवैधानिक करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

तीसरा झटका-8 जुलाई 2016- सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को झटका, हाईकोर्ट की सुनवाई में नहीं करेगी हस्तक्षेप दिल्ली की केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. केंद्र के साथ अधिकारों की लड़ाई को लेकर केजरीवाल सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार लताड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चकी है और अब उसे रोका नहीं जा सकता। अगर हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट न हो तो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

चौथा झटका-8 जुलाई 2016- सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को झटका, पूर्ण राज्य के मामले में दिल्ली सरकार की याचिका सुनने से किया इनकार सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली सरकार को झटका लगा है। दिल्ली सरकार अपनी और केंद्र सरकार की शक्तियों की व्याख्या करने के लिए कोर्ट की शरण में गई थी। दिल्ली सरकार की याचिका में दिल्ली के पूर्ण राज्य के दर्जे वाली स्थिति को स्पष्ट करने की भी मांग थी। कोर्ट ने दिल्ली सरकार की इस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया है।

CM केजरीवाल LG जंग के बीच 'जंग' कोई नई नहीं है... कई मुद्दों LG केजरीवाल सरकार को दे चुके हैं झटके फरवरी 14, 2015 को अरविंद केजरीवाल की सीएम पद की शपत के बाद से ही, दिल्ली पुलिस, डीडीए और अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर केजरीवाल सरकार LG से टकराती नजर आई है। कब-कब आए केजरीवाल-LG जंग आमने-सामने...

- 18 मार्च 2015- आप विधायकों से मारपीट के मामले की मजिस्ट्रेट जांच को LG नजीब जंग ने किया खारिज।  - 22 अप्रैल 2015- नौकरशाही पर उपराज्यपाल नजीब जंग ने सीएम केजरीवाल को नसीहत दे डाली, कानून के दायरे में रहकर काम करें। - 3 मई 2015- फाइल भेजने के मामले में LG का फटकार, विधानसभा के सभी कानून LG के पास अंतिम मंजूरी के लिए आना जरूरी है। - 15 मई 2015- दिल्ली के मुख्य सचिव केके शर्मा छुट्टी पर के बाद LG ने शकुंतला डी गामलिन को कार्यकारी मुख्य सचिव बनाया।  - 18 मई 2015- LG नजीब जंग ने सेक्रेटरी (सर्विसेस) के पद पर राजेंद्र कुमार की नियुक्ति को रद्द कर दिया। - 3 जून 2015- भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) में बिहार के पांच पुलिसकर्मियों की नियुक्ति को LG ने खारिज किया। - 9 जून 2015- LG नजीब जंग ने दिल्ली पुलिस के एक संयुक्त आयुक्त मुकेश मीणा को एसीबी का प्रमुख नियुक्त किया।  - 22 जुलाई 2015- एलजी नजीब जंग ने दिल्ली महिला आयोग में अध्यक्ष के तौर पर स्वाति मालिवाल की नियुक्ति रद्द कर दी, बाद में मंजूरी दी।