इस 'गैरकानूनी' हरकत के लिए SC ने लगाई 'गूगल-याहू' की फटकार

नई दिल्ली (5 जुलाई): सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू सर्च इंजन्स की फटकार लगाई। कोर्ट ने ये फटकार प्रसव से पहले लिंग की पहचान कराने वाली सर्विसेस के विज्ञापन चलाने के लिए लगाई है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से इसे रोकने के लिए एक मेमोरेंडम लाने के लिए कहा है।

'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "क्या ये सर्च इंजन लगातार कानून का उल्लंघन करते रहेंगे? क्या उन्हें पूरी तरह से रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता? गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, याहू लगातार माध्यम होने के नाम पर गैरकानूनी गतिविधियां कर रहे हैं।"

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इन प्रमुख सर्च इंजन और याचिकाकर्ताओं के साथ मीटिंग कर उचित समाधान निकालने के लिए निर्देश दिए हैं। इंटरनेट कम्पनियों के वकीलों ने दलील दी है कि विज्ञापनों को तुरंत ही ब्लॉक कर दिया जाता है, जैसे ही ये पॉप-अप होते हैं। उन्होंने कहा, "अगर हम कुछ की-वर्ड्स के साथ इसे ब्लॉक करेंगे, तो सारा कंटेंट ही ब्लॉक हो जाएगा।"

सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर अगली सुनवाई 25 जुलाई को करेगा। यह जनहित याचिका साबू मैथ्यू जॉर्ज की तरफ से दायर की गई। जिन्होंने लिंग-निर्धारण किट, उपकरणों और क्लीनिक्स के वेबसाइट्स पर विज्ञापनों को बंद करने के लिए कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की थी। 

जॉर्ज ने आरोप लगाया कि लिंग-निर्धारण विज्ञापन और उनके लिंक्स सर्च इंजन्स पर मुफ्त में उपलब्ध हैं। जो प्री-कन्सेप्शन और प्री-नटाल डायोग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट के खिलाफ है। जो कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए 1994 में लागू हुआ।