'जेल के अंदर हो या बाहर बरकरार है मुजरिम से माननीय बने अतीक अहमद का आतंक'

न्यूज 24 ब्यूरो नई दिल्ली (25 अप्रैल): धौंस और दहशत के बल पर मुजरिम से माननीय बने अतीक अहमद को उत्तर प्रदेश के बरेली सेंट्रल जेल से गुजरात भेजने की मंशा उसके आपराधिक गतिविधयों पर लगाम लगाना थी लेकिन उसके गुर्गों ने अदालत और सरकार के इस फैसले को भी भुनाना शुरू कर दिया है। अतीक के गुर्गे उसे अब हिंदुस्तान का सबसे बड़ा डॉन बताने लगे हैं।जेल के भीतर से अपहरण और बसूली के आरोपों के चलते अतीक अहमद को बरेली जेल भेजा गया था। अतीक अहमद के बरेली आते ही उसके गुर्गों ने बरेली में डेरा डाल दिया। बरेली का महौल न बिगडे इसलिए बरेली के जिला प्रशासन ने चुनाव तक किसी और जेल भेजने का अनुरोध किया। 19 अप्रैल को उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद को गुजरात की जेल भेज दिया गया ताकि वह यूपी में अपना उगाही का धंधा न चला सके।अपराध जगत में उनकी शुरुआत 1979 में इलाहाबाद में हत्‍या के मामले से हुई थी। उस समय अतीक की उम्र मात्र 17 साल की थी। अगले तीन दशक तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में उन्‍होंने एक गिरोह चलाया। प्रयागराज के क्राइम ब्रांच के एसपी मनोज अवस्‍थी के मुताबिक  खुल्‍दाबाद थाने के रजिस्टर नंबर आठ में  अतीक अहमद का हिस्‍ट्री शीट नंबर 39A है। बताया जाता है कि 39 के A उन अपराधियों के साथ लिखा जाता है जो न केवल सक्रिय होते हैं बल्कि समाज के लिए 'खतरनाक' माना जाता है।   पुलिस के मुताबिक अतीक के गैंग को 'अंतरराज्‍य गिरोह 227' के रूप में लिस्‍टेड किया गया है जिसमें 121 सदस्‍य शामिल हैं।गैंग में अतीक के बाद उसके छोटे भाई अशरफ का नंबर आता है। दोनों भाइयों पर 150 मुकदमे दर्ज हैं। अतीक अहमद के मुजरिम से माननीय बनने की कहानी 1989 में शुरु होती है। उसने 2004 तक वह छह चुनाव जीते। इसमें पांच बार वह इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक और एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे। अतीक ने निर्दलीय उम्‍मीदवार के रूप में राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी लेकिन बाद में उन्‍होंने समाजवादी पार्टी जॉइन कर ली। इसके बाद वह अपना दल चले गए।वर्ष 2004 के चुनाव में अतीक ने एसपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में उन्‍हें असफलता हाथ लगी। वर्ष 2018 के लोकसभा उपचुनाव में अतीक अहमद चुनाव लड़े और उन्‍हें शिकस्‍त मिली। एसपी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव खुलेआम कह चुके हैं कि वह अतीक को नापसंद करते हैं। इन सबके बीच अतीक का नाम वर्ष 2005 में बीएसपी एमएलए राजू पाल की हत्‍या में आया था। राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ को चुनाव में हराया था।(Image Courtesy:Google)