डिसेबल पैसेंजर को उतारा था प्लेन से नीचे, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली(13 मई): सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक एतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पाइस जेट एयरलाइंस पर 10 लाख रुपए हर्जाना देने का फैसला सुनाया है। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित वुमन पेसेंजर जीजी घोष को प्लेन से उतारने के मामले में कोर्ट ने स्पाइस जेट एयरलाइंस को ये  हर्जाना देने का फैसला सुनाया।

कोर्ट के मुताबिक जिस तरह से पेसेंजर को प्लेन से उतारा गया, उसमें संवेदनहीनता नजर आती है। बता दें कि यह मामला साल 2012 का है। इतना ही नहीं जजों की बेंच ने स्पाइसजेट को दो महीनों के भीतर हर्जाने की रकम देने को कहा है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एके सिकरी और आरके अग्रवाल की डिविजन बेंच ने कहा कि घोष को प्लेन से उतारकर खराब बर्ताव किया गया। यह रूल्स, 1937 और सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स, 2008 की गाइडलाइंस का उल्लंघन है। 

कोर्ट ने कहा कि एयरलाइंस ने बिना किसी डॉक्टर की एडवाइज के घोष को प्लेन से उतारने का फैसला किया। इस कारण से उन्हें मेंटली और फिजिकली परेशानियों से गुजरना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि स्पाइसजेट की हरकत से उनके फंडामेंटल राइट्स का भी वॉइलेशन है। हमें डिसेबल्स के प्रति सोच बदलनी चाहिए। हम उन पर दया तो दिखाते हैं, लेकिन उन्हें मेनस्ट्रीम में लाने के बारे में नहीं सोचते। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने सीविल राइट एक्ट 2014 में और सुधार किए जाने की बात भी कही।

46 साल की मिस घोष कोलकाता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरेब्रल पाल्सी में प्रोफेसर हैं।  2012 में जब वे कोलकाता से गोवा जा रही थीं तब स्पाइसजेट के एक प्लेन के पायलट ने घोष को नीचे उतार दिया था। जबकि उनके पास कोलकाता बोर्डिंग पास था। हालांकि, एयरलाइंस का मानना था कि वे ट्रैवल करने में सक्षम नहीं हैं। इतना ही नहीं उन्हें दूसरे पैसेंजर्स के लिए खतरा भी माना गया। बाद में एयरलाइन ने 2012 में बयान जारी करते हुए घोष को हुई असुविधा के लिए माफी मांग ली थी।माफी के बावजूद गई कोर्ट में

एयरलाइन द्वारा माफी मांगने के बावजूद मिस घोष ने इस व्यवहार से नाराज होकर स्पाइसजेट को अदालत में ले जाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की हेल्प से सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की और मुआवजे की मांग की। साथ ही भारत में सिविल एविएशन की गाइडलाइन में बदलाव की भी डिमांड की।