हिंदुत्व जीवनशैली है धर्म नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली ( 25 अक्टूबर ) : सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संविधान पीठ ने आज साफ कर दिया कि कोर्ट के 1955 के उस जजमेंट पर पुनर्विचार नहीं करेगी जिसमें कहा गया था 'हिंदुत्व धर्म नहीं बल्कि जीवनशैली है'। हिंदुत्व शब्द की दोबारा व्याख्या से सुप्रीम कोर्ट के 7जजों की बेंच ने इनकार कर दिया। 

क्या था 1995 में कोर्ट का फैसला? बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने दिसंबर 1995 में फैसला दिया था कि चुनाव में हिंदुत्व का इस्तेमाल गलत नहीं है क्योंकि हिंदुत्व धर्म नहीं बल्कि एक जीवन शैली है। जस्टिस जेएस वर्मा की अगुआई वाली बेंच ने यह फैसला दिया था। कोर्ट ने कहा था, 'हिंदुत्व शब्द भारतीय लोगों के जीवन पद्धति की ओर इशारा करता है। इसे सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं किया जा सकता, जो अपनी आस्था की वजह से हिंदू धर्म को मानते हैं। इस फैसले के तहत, कोर्ट ने जनप्रतिनिधि कानून के सेक्शन 123 के तहत हिंदुत्व के धर्म के तौर पर इस्तेमाल को 'भ्रष्ट क्रियाकलाप' मानने से इनकार कर दिया था।