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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, कॉलेजियम की सलाह के बिना न नियुक्त करें जज

नई दिल्ली (28 अक्टूबर): हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर एकबार फिर केंद्र और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से भेजे गए नामों के मंजूर न होने पर नाराजगी जताते हुए सरकार से सफाई मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार न्यायपालिका के साथ टकराव जैसे हालात पैदा कर रही है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता इस संस्थान को खराब कर रही है। आज हालात ये हैं कि कोर्ट को ताला लगाना पड़ा है। कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट में पूरा ग्राउंड फ्लोर बंद है। क्यों ना पूरे संस्थान को ताला लगा दिया जाए और लोगों को न्याय देना बंद कर दिया जाए। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को  ईगो का मुद्दा ना बनाए। साथ ही उन्होंने कहा कि हम बड़े सब्र से काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार बताए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की सूची का क्या हुआ। सरकार 9 महीने से इस सूची पर क्यों बैठी है? अगर सरकार को इन नामों पर कोई दिक्कत है तो हमें भेजें, फिर से विचार करेंगे.

केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, हाईकोर्ट के जजों की सूची में कई नाम हैं जो सही नहीं हैं. सरकार ने 88 नाम तय किए, लेकिन सरकार एमओपी तैयार कर रही है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी.

 

गौरतलब है कि फरवरी में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के ट्रांसफर की लिस्ट भेजी गई, लेकिन सरकार ने कुछ भी नहीं किया. दरअसल सुप्रीम कोर्ट उस जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है, जिसमें अदालतों में लंबित मामलों को लेकर कदम उठाने की मांग की गई है.  याचिका में कहा गया है कि लॉ कमीशन की उस रिपोर्ट को लागू किया जाए, जिसमें जजों की संख्या बढ़ाने को कहा गया था.


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