24 हफ्ते के गर्भपात को मिली मंजूरी, SC ने सुनाया फैसला

  नई दिल्ली (25 जुलाई): सुप्रीम कोर्ट ने 24 हफ्ते की गर्भवती महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी है। मुंबई की इस महिला ने सुप्रीम कोर्ट में प्रेगनेंसी एक्ट 1971 को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती थी, जिसके बाद कोर्ट ने महिला की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया था।

मेडिकल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के बाद महिला को गर्भपात कराने की इजाजत मिल गई। पीड़िता का यह भी कहना था कि गर्भ के चलते उसकी जान को खतरा है। पीड़िता के मुताबिक, उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण सामान्य रूप से विकसित नहीं हो रहा है। उसके जन्म लेते ही मर जाने की आशंका है। पीड़िता का तर्क था कि जब ये कानून बना था उस वक्त 20 हफ्ते की गर्भपात का नियम ठीक था, लेकिन अब वक्त बदल चुका है। ऐसे में अब 26 हफ्ते बाद भी गर्भपात हो सकता है।

गौरतलब है कि भारतीय कानून के मेडिकल टेर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 के मुताबिक 20 हफ्ते से ज्यादा गर्भवती महिला का गर्भपात नहीं हो सकता। इस कानून को चुनौती देते हुए महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह बेहद ही गरीब परिवार से है।

यह है मामला: पीड़िता के मुताबिक,  2 जून, 2016 को डॉक्टरों ने उसका गर्भपात करने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों ने गर्भपात नहीं करने के पीछे कानून का हवाला दिया। साथ ही कहा था कि वह चाहे तो भी गर्भपात नहीं करवा सकती।

मजबूरन करना पड़ा कोर्ट का रुख: पीड़िता का कहना है कि चारों ओर से निराशा मिलने के चलते उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।