News

साल 2020 में महंगाई के बीच रोजगार में दिखेगी मार,SBI की रिपोर्ट में दावा

महंगाई की मार हर वर्ग में देखने के लिए मिल रही है। महंगाई की मार से आम लोग काफी परेशान चल रहे है तो वहीं दूसरी तरफ यूथ भी नौरकरियों को लेकर दर दर भटक रहे है। बीते साल से बेरोजगारी की मार झेल रहे लोग अब वित्त वर्ष 2020 में कम नौकरियां मिल सकती है। एसबीआई ने सोमवार को अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट इकोरैप में अनुमान जताया है कि आर्थिक सुस्ती की वजह से चालू वित्त वर्ष में करीब 16 लाख रोजगार कम आएंगे। इसका ज्यादा असर यूपी, बिहार जैसे राज्यों पर रोजगार की कमी का ज्यादा असर दिखेगा।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 जनवरी):    महंगाई की मार हर वर्ग में देखने के लिए मिल रही है। महंगाई की मार से आम लोग काफी परेशान चल रहे है तो वहीं दूसरी तरफ यूथ भी नौरकरियों को लेकर दर दर भटक रहे है। बीते साल से बेरोजगारी की मार झेल रहे लोग अब वित्त वर्ष 2020 में  कम नौकरियां मिल सकती है।

एसबीआई ने सोमवार को अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट इकोरैप में अनुमान जताया है कि आर्थिक सुस्ती की वजह से चालू वित्त वर्ष में करीब 16 लाख रोजगार कम आएंगे। इसका ज्यादा असर यूपी, बिहार जैसे राज्यों पर रोजगार की कमी का ज्यादा असर दिखेगा।

इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में ईपीएफओ ने देशभर में 89.7 लाख नए लोगों का पंजीकरण किया। उस दौरान विकास दर करीब सात फीसदी थी, जबकि 2019-20 में विकास दर पांच फीसदी से भी नीचे जाने की आशंका है। इस सुस्ती से चालू वित्त वर्ष में 15.8 लाख रोजगार कम आने की आशंका है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) 15 हजार प्रतिमाह से कम वेतन वाले श्रमिकों का पंजीकरण करता है। अप्रैल-अक्तूबर 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 43.1 लाख रोजगार सृजन हुआ, जो वित्त वर्ष की समाप्ति तक 73.9 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। 

एसबीआई के अनुसार, इस साल देखा गया है कि असम, राजस्थान, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्यों में श्रमिकों के पैसे घर भेजने वालों में कमी देखी गई है। यहां के लोगो नौकरी के आस में बड़ी संख्या लोग रोजगार की तलाश में पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली आते हैं। रोजगार मिलने पर ये लोग अपने परिवार के पास बड़ी मात्रा में पैसे भेजते हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इन पैसों की औसत वृद्धि 9.4-9.9 फीसदी पर टिकी है। यह दर्शाता है कि श्रमिकों की वेतन वृद्धि काफी धीमी हो रही है और नए रोजगार में ज्यादा बढ़ोतरी भी नहीं हुई। 

ईपीएफओ किसी भी तरह की सरकारी और निजी नौकरियों का आंकड़ा नहीं जुटाता है, बल्कि इन आंकड़ों को रखने का काम 2004 से नेशनल पेंशन स्कीम को सौंप दिया गया है। एसबीआई ने कहा, एनपीएस श्रेणी के रोजगार सृजन में भी बड़ी गिरावट दिखाई दे रही है। अभी तक के प्रदर्शन के आधार पर अनुमान है कि केंद्र और राज्य सरकारें 2019-20 में नई नौकरियों की संख्या 39,000 की कटौती कर सकती हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत में छाई सुस्ती की वजह से नए श्रमिकों की मांग लगातार घट रही है। कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, जिनके समाधान में देरी की वजह से ठेके पर श्रमिकों की भर्ती में बड़ी गिरावट आई है। कंपनियों की ओर से श्रमिकों के वेतन में कम बढ़ोतरी भी चिंता का विषय है। इस कदम से अधिक कर्ज लेने की दर बढ़ने का खतरा है, जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय तंत्र के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। 


Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram .

Tags :

Top