'से नो टू प्लास्टिक' कंपैन को लेकर मोदी सरकार ने बनाया मास्टर प्लान

कुंदन सिंह, न्यूज़ 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(21 अगस्त):  केंद्र सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगाने की मुहिम की शुरुआत दो अक्तूबर से करेगी। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 लाख लोगों को ईमेल कर उनका आभार जताएंगे। पीएम ने स्वतंत्रता दिवस पर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को बंद करने के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया था। 

इसके तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देशभर में जागरूकता अभियान चलाएगा। इसकी शुरुआत दो अक्तूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से होगी। राज्यों के अतिरिक्त केंद्र भी सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने के लिए नीति तैयार करेगा। प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने और इस पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए दंड के प्रावधानों पर भी विचार किया जा रहा है।  'से नो टू प्लास्टिक'  कैंपेन को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार का पशुपालन और मत्स्य मंत्रालय दूध और उससे बने उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने साथ ही पैकेजिंग रैपर के रीसाइक्लिंग करने और मिल्क पैकेज के वापस को री कलेक्ट करेगी साथी पुराने रात भर वापस करने वाले ग्राहकों को इंसेंटिव भी देगी। 

लाल किले के प्राचीर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2 अक्टूबर से प्लास्टिक को बैन करने की अपील को देखते हुए 'से नो टू प्लास्टिक' कैंपेन को लेकर पशु पालन मंत्रालय ने  देश के तमाम मिल्क कॉपरेटिव फेडरेशन और प्राइवेट डेयरी  प्रोड्यूसर की बैठक कर दुध और उससे जुड़े उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने साथ ही उनकी पैकेजिंग में रीकलेक्ट किये गए रैपरों को  रिसाइक्लिंग कर फिर से उपयोग करने की योजना पर काम करने को कहा गया था। साथ ही रैपर को रीसाइक्लिंग में मदद करने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए पैकेजिंग मैटेरियल वापस करने के बदले उनको खरीदारी पर छूट देने की बात कही गई हैं,  जिससे प्रोत्साहित होकर उपभोक्ता रैपर को कूड़े का हिस्सा न बनाकर उसे संभाल कर पुनः मिल्क बूथ में वापस करे।।

मंत्रालय के तरफ से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए रिड्यूस, रिबेट और री यूज़ मॉडल पर ध्यान में रखकर रोड मैप तैयार करने को कहा गया है। जिसे आने वाले 2 अक्टूबर को लागू किया जा सके। गौरतलब हैं कि देशभर की मिल्क कॉपरेटिव संगठनों के अलावा निजी क्ष्रेत्र की डेयरी कंपनियों में रोजाना मिल्क और मिल्क प्रोडक्ट में बड़े पैमाने पर पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक का प्रयोग होता हैं जिनमें ज्यादातर रैपर प्रयोग के बाद वेस्ट में तब्दील हो जाते है जो कि प्रदूषण और इससे जुड़े दूसरे तरह से हैजर्ड पैदा करते है। अब प्रधानमंत्री के अपील के बाद मंत्रालय की कोशिश है कि इसके प्रयोग को मिनिमाइज किया जाए साथ ही रैपर और पैकेजिंग मैटेरियल को री साइकिल कर फिर से रीयूज किया जाए।