8 दशक बाद इस राजघराने का लगा शाही दरबार

जयपुर (12 जुलाई): राजघराने में करीब 8 दशक बाद एक ख़ास समारोह का आयोजन कर शाही दरबार लगाया गया। इसमें राजस्थान में रॉयल फेमिली के कई सदस्यों के अलावा पूर्व सामंत और जागीरदारों ने भाग लिया। मौका था जयपुर राजघराने के सदस्य पद्मनाभ सिंह के 18वें जन्म दिन के साथ-साथ उनको रियासत का बालिग़ उत्तराधिकारी बनने का।

जश्न का माहौल और स्वागत सत्कार का रंग ऐसा कि नए महाराज ने भी उत्साहित होकर अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद राजनीति में आने का ऐलान कर दिया। दशकों बाद शायद यह पहला मौका था जब इतने बड़े स्तर पर यहां कोई शाही कार्यक्रम हुआ, जिसमें नजराना पेश करने से लेकर वह सभी रस्में और परम्पराएं निभाई गई जिसके लिए राजस्थान के शाही परिवार जाने भी जाते हैं। हालांकि 6 साल पहले सवाई पद्मनाभ को उत्तराधिकारी बनकर राजतिलक किया गया था।

अब उत्तराधिकारी पद्मनाभ 18 साल के हो गए हैं और राजपरिवार से जुड़े सभी फैसले लेने को स्वतंत्र हो गए हैं। इसके लिए बाकायदा शाही दरबार लगाया गया। राज्य के सभी पूर्व राजघराने के लोगों के साथ करीब 700 ताजिम सरदार, जागीरदार, ठिकानेदार और जयपुर राजपरिवार से ताल्लुक रखने वालों को बुलाया गया, जिन्होंने इस राजपरिवार के सर्वमान्य मुखिया को जन्मदिन की बधाई देते हुए कार्यभार संभालने की बधाईयां दी। बाकायदा ठीक उसी तरह से नजराना पेश किया गया, जैसा दशकों पहले मानसिंग के 18वें जन्मदिन पर यहां जश्न का माहौल था।

शाही जश्‍न का माहौल था तो सवाई पद्मनाभ ने भी अपनी प्राथमिकता गिनवा दी। साथ ही कहा की इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राजनीति के आकर जयपुर की जनता की ठीक उसी तरह सेवा करेंगे जिसके लिए की उनका परिवार जाना जाता है। दरअसल सवाई मानसिंह जयपुर के अंतिम शासक थे। उनकी पहली पत्नी मरुधर कंवर के पुत्र ब्रिगेडियर भवानी सिंह को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं होने के चलते भवानी सिंह ने अपनी पुत्री दीया कुमारी के बेटे पद्मनाभ को साल 2011 में गोद लिया और उनके उत्तराधिकारी के तौर पर उनका राजतिलक हुआ।

पूर्व राजधराने के अब तक के पद्मनाभ सबसे छोटे प्रमुख हैं। राजतिलक होने के बाद से ही अब तक पद्मिनी देवी के संरक्षण में अब तक पद्मनाभ राजकाज को समझने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सभी फैसले पद्मिनी देवी के ही होते थी। बालिग होने के साथ ही राजपरिवार के नियमानुसार अब उन्हें खुलकर अपने फैसले लेने की आज़ादी मिल गई है।