10 सुरक्षा कर्मियों की जान बचाने वाले 2 SPO को J&K पुलिस में स्थाई नौकरी

नई दिल्ली (26 सितंबर): रविवार को आतंकियों के ग्रेनेड हमले से 10 सुरक्षा कर्मियों की जान बचाने वाले जम्मू-कश्मीर के दो एसपीओ को जम्मू-कश्मीर पुलिस में स्थाई नौकरी दी जायेगी। जम्मू-कश्मीर के सोपोर में रविवार सुबह एक आतंकी ने सुरक्षाकर्मियों के बंकर पर ग्रेनेड अटैक किया।  उस वक्त एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) ने समझदारी से काम न लिया होता तो कम से कम 10 सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ती या फिर वे बुरी तरह से घायल हो जाते।

एसपीओ अहमद लोन (बदला हुआ नाम) रविवार को सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर की संयुक्त टीम में शामिल थे और सोपोर के बाटपोर चौक पर तैनात थे। वह सीआरपीएफ बटालियन परिसर के विपरीत एक बुलेटप्रूफ बंकर वैन में थे। उन्हें और उनके साथियों को नियमित अभियान के लिए निकलना था। 

सुबह 9.37 के करीब एक आतंकी बंकर की तरफ बढ़ा और उसने एक ग्रेनेड दागा। यह लोन की गोद में गिरा। बिना घबराए लोन ने फुर्ती से ग्रेनेड को पकड़ा और उसे सड़क पर फेंक दिया, जबकि दूसरे एसपीओ सलीम बशीर (काल्पनिक नाम) ने भी फुर्ती दिखाई और तेजी से बंकर वैन का गेट बंद कर दिया।' 

सीआरपीएफ के आईजी (ऑपरेशंस) जुल्फिकार हसन ने बताया कि यह ग्रेनेड को वापस फेंकते ही फट गया। इसमें एक कॉन्स्टेबल और एसपीओ को मामूली चोटें आईं। अहमद लोन ने यह चतुराई नहीं दिखाई होती और घबरा जाता तो ग्रेनेड बंकर के फ्लोर पर गिर जाता और बड़ी क्षति होती।'

हसन ने बताया कि लोन के निडर, हालात के मुताबिक त्वरित प्रतिक्रिया ने 10 सुरक्षाकर्मियों की जिंदगी बचा ली। सीआरपीएफ ने एसपीओ लोन को 25,000 रुपये और एसपीओ सलीम को 10,000 रुपये का पुरस्कार दिया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस में स्थायी नौकरी के लिए भी उनके नाम की सिफारिश की गई है, जिसे डीजीपी एस.पी.वैद ने स्वीकार कर लिया है। 

लोन के सहकर्मी बताते हैं कि वह बेहद समर्पित है। एक पुलिसकर्मी होने के नाते उसके परिवार को आतंकियों से खतरा होने के बावजूद वह इस काम को जारी रखना चाहते हैं। एसपीओ बनने से पहले लोन छह साल तक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते थे। 15 साल की उम्र में पिता की मदद के लिए उसने काम करना शुरू किया था। उनके परिवार में 6 सदस्य हैं जो उनकी आय पर निर्भर हैं। लोन पिछले जून से एसपीओ के रूप में काम कर रहे हैं और उन्हें हर महीने 6000 रुपये वेतन मिलता है। 

अधिकारियों ने बातया कि अस्थायी रूप से काम करने वाले स्पेशल पुलिस ऑफिसर घाटी में आतंकवाद से निपटने में काफी प्रभावी रहे हैं क्योंकि उनके पास स्थानीय चीजों को जानकारी और इंटेलिजेंस नेटवर्क है, लेकिन आतंकी उन्हें लगातार निशाना बना रहे हैं।