सऊदी अरब में भारतीय की टॉर्चर से मौत, दूसरे कर्मचारियों को डराने के लिए वीडियो बनाया!

नई दिल्ली (13 अप्रैल) :  दो साल पहले झारखंड के युवक मोहम्मद अफ़सर अंसारी को सऊदी अरब में नौकरी मिली तो उसे लगा कि वो अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी दे सकेगा। लेकिन अब उसकी विधवा नौशाबा बानो उसके अवशेष भारत लाने के लिए जंग लड़ रही है।

अंसारी की मार्च 2015 में रहस्यमयी परिस्थितियों में सऊदी अरब में मौत हो गई थी। अंसारी के परिवार का आरोप है कि उसके नियोक्ता ने उसकी हत्या कर दी। फिर उसका वीडियोटेप भी बनाया जिससे कि उन दूसरे कर्मचारियों को डराया जा सके जो नौकरी छोड़कर वापस स्वदेश जाना चाहते हैं।

मेल  टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक परिवार का दावा है कि असांरी सऊदी अरब की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में बुलडोज़र ऑपरेटर की अपनी नौकरी छोड़ना चाहता था। आरोप है कि वो अपनी कंपनी की शोषण वाली नीतियों से तंग आ गया था। जब अंसारी की पत्नी नौशाबा बानो को मार्च में उसकी मौत का पता चला तो उसने अपने वकील जोस अब्राहम के ज़रिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

नौशाबा बानो की याचिका में कहा गया है कि उसके पति अंसारी और दो अन्य कर्मचारियों ने भारत वापस जाने की बात कही तो उनके साथ ज़ोर जबर्दस्ती शुरू कर दी गई। अंसारी के भाई मुख्तार के मुताबिक उसके दूसरे साथियों से परिवार को पता चला कि उस पर बुरी तरह प्रहार किए गए जिससे उसकी मौत हो गई। अंसारी के साथ जो किया गया उसका वीडियो बनाकर भी दूसरे कर्मचारियों को धमकाने के लिए दिखाया गया जिससे कि दोबारा कोई भारत वापस जाने की बात नहीं कर सके।  

हाईकोर्ट ने दिसंबर में भारत सरकार को निर्देश दिया था कि वो सऊदी अरब में भारतीय दूतावास से संपर्क कर अंसारी के अवशेषों को जल्दी से जल्दी भारत लाना सुनिश्चित करे। कोर्ट ने कहा था कि ये काम एक महीने में हो जाना चाहिए।

भारत सरकार के स्थायी अधिवक्ता राजेश कुमार गोगना ने कहा, "कोर्ट ने सऊदी अरब में भारतीय दूतावास से रिपोर्ट मांगी है। हम इस मामले में याचिकाकर्ता की हर संभव सहायता करने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय दूतावास से रिपोर्ट मांगी गई है ताकि जिसे 19 अप्रैल तक दाखिल किया जा सके।"

नौशाबा बानो के वकील जोस अब्राहम ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता की जगह नियोक्ता कंपनी को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया, इससे परिवार को आशंका है कि नियोक्ता अंसारी का शव परिवार को सौंपने की जगह सऊदी अरब में ही दफना देगा। सऊदी अरब में प्रचलन के मुताबिक एक साल से अधिक किसी शव को नहीं रखा जाता। नौशाबा बानो ने कहा है कि वो किसी भी हाल में अपने पति को सऊदी अरब में दफनाने नहीं देना चाहतीं। वो चाहती हैं कि उनके पति भारत में ही सुपुर्दे-ख़ाक किए जाएं।

नवंबर 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में बताया था कि खाड़ी देशो में उस साल कार्यरत 7,432 कर्मचारियों से नियोक्ताओं के उत्पीड़न की शिकायत मिली थी। सबसे ज़्यादा 3,236 शिकायत कुवैत और 2,472 शिकायत सऊदी अरब से मिली थीं।