'सऊदी सेनाएँ बुझदिल और डरपोक हैं'

नई दिल्ली (8 फरवरी): ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के मुखिया मुहम्मद अली ज़ाफरी ने सऊदी अरब के उस बयान की खिल्ली उड़ायी जिसमें कहा गया है कि यदि अमेरिका सीरिया में आईएसआईएस के खिलाफ जमीनी जंग शुरु करता है तो रियाद अपनी सेनाएं वहां भेजने को तैयार है। ज़ाफरी ने कहा है कि सऊदी अरब में हिम्मत नहीं है कि वो अकेले अपनी सेनाएं आईएसआईएस के खिलाफ भेज सके...और अगर सऊदी सेनाएं सीरिया पहुंच भी गयीं तो वहां से वापस आना उनके लिए नामुमकिन होगा। क्यों कि ये उनके लिए खुदकुशी जैसा कदम होगा।

ईरान सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थन में अपनी सेनाएं पहले ही भेज चुका है। जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सीरिया के विद्रोहियों की मदद कर  रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि बशर को सत्ता छोड़ देनी चाहिए। इस वर्ष जनवरी की शुरुआत में तेहरान स्थित सऊदी एम्बैसी पर हमले के बाद सऊदी अरब समेत कई देशों ने ईरान से संबंध विच्छेद कर लिये थे। हालांकि ईरान सरकार का कहना था कि पुलिस के तमाम इंतजामात के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी एम्बैसी में घुस गये और उन्होंने ही हमला किया था। सऊदी अरब और ईरान के बीच तभी से तलवारें खिंची हुई हैं।