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सऊदी अरब पर भारी मंदी की आशंका!

नई दिल्ली (6 अक्टूबर): सऊदी अरब की आर्थिक ताकत तेल है, लेकिन इन दिनों तेल के दामों में भारी गिरावट के बाद वहां पर मंदी का माहौल बना हुआ है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इकॉनमी को उबारने के लिए की जा रही कॉस्ट कटिंग की कोशिशों के चलते इकॉनमी में मंदी का माहौल बन रहा है। इसका मतलब यह है कि 2016 की ओवरऑल ग्रोथ में इन उपायों की बजाय रेकॉर्ड क्रूड उत्पादन की हिस्सेदारी होगी।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सस्ते तेल की कीमतों के असर से निपटने के प्रयास बीते दो सप्ताह में और तेज हुए हैं। सऊदी अरब के आर्थिक नीति-निर्माताओं ने सरकारी एंप्लॉयीज के बोनस और अलाउंसेज रोक दिए हैं। इसके अलावा मंत्रियों की सैलरी में भी 20 पर्सेंट तक की कटौती की गई है। सऊदी केंद्रीय बैंक का भी कहना है कि वह मार्केट में कैश की कमी को दूर करने के लिए 5.3 अरब अमेरिकी डॉलर बाजार में लगाएगा।

सऊदी विश्लेषकों का मानना है कि खर्च में कटौती से बजट घाटे को कम करने में मदद मिलेगी, जो पिछले साल जीडीपी के 16 पर्सेंट के करीब पहुंच गया था। लेकिन, इसके चलते एक संकट और पैदा हो सकता है क्योंकि मांग में कमी के चलते मंदी की भी आशंका है। ब्लूमबर्ग के सर्वे के मुताबिक इस साल सऊदी इकॉनमी की ओवरऑल ग्रोथ 1.1 पर्सेंट रह सकती है, जो 2009 के बाद सबसे कम होगी।


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