सऊदी अरब की महिलाएं ओलंपिक जा सकती हैं लेकिन देश में उनके खेलने पर बैन

नई दिल्ली (9 अगस्त) :  सऊदी अरब की एथलीट साराह अत्तार ने 2012 में लंदन ओलंपिक में 800 मीटर की दौड़ में फिनीश लाइन को पार किया था तो वहां मौजूद 80,000 दर्शकों ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया था। नहीं, साराह ने कोई मेडल नहीं जीता था बल्कि वो अपने प्रतिद्वन्द्वियों से आधा मिनट के अंतर से पीछे रही थीं। दरअसल, साराह का सम्मान इसलिए किया गया था कि वो ओलंपिक के इतिहास में नुमाइंदगी करने वाली सऊदी अरब की पहली महिला खिलाड़ी बनी थीं। इससे पहले तक सऊदी अरब सरकार महिलाओं को इसकी इजाजत नहीं देती थी। साराह के साथ एक और महिला खिलाड़ी  वोजदान शाहेरकनी को भी 2012 ओलंपिक में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी।  

2016 रियो ओलंपिक में सऊदी अरब ने इस बार चार महिला खिलाड़ियों को भेजा है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि सऊदी अरब में महिलाओं के लिए स्थिति बदल गई हैं। सऊदी अरब में अब भी महिलाओं पर तमाम बंदिशें हैं। आज भी वहां महिलाएं सरकारी स्तर पर आयोजित खेल प्रतियोगिताओं, राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं ले सकतीं। यहां तक कि वे राष्ट्रीय टीम के हिस्सा लेने पर दर्शकों के तौर पर भी नहीं देख सकतीं। सऊदी अरब में 150 ऑफिशियल स्पोर्ट्स क्लब हैं, लेकिन इनमें से कोई भी महिलाओं के लिए नहीं खुला है।

सऊदी अरब में लड़कों के स्कूल में जिम का होना अनिवार्य है। लेकिन लड़कियों के अधिकतर स्कूलों में फिजीकल एजुकेशन सिलेबस का हिस्सा नहीं है। सऊदी अरब में फिटनेस स्टूडियोज़ में महिलाएं पुरुषों के साथ एक्सरसाइज नहीं कर सकतीं। ना ही वहां सिर्फ महिलाओं वाले फिटनेस सेंटर हैं। ऐसे सेंटर को लाइसेंस ही नहीं दिए जाते।   

क्वार्ट्ज की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी स्कॉलर अली अल अहमद का कहना है कि सऊदी अरब की ओर से इक्का-दुक्का महिलाओं को 2012 और मौजूदा ओलंपिक में भेजने से स्थिति और खराब हो गई है। ऐसा कर सऊदी अरब महिलाओं को लेकर होने वाली आलोचना से बच गया है। ये सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिखाने के लिए किया गया है।