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'पत्रकार खशोगी की हत्या के सबूत छिपाने के लिए सऊदी अरब ने भेजे थे विषेषज्ञ'

तुर्की के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि सऊदी अरब ने तुर्की के इस्तांबुल में अपने वाणिज्य दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद सबूतों को छिपाने के खास मकसद से 2 विशेषज्ञों को भेजा था।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 5 नवंबर ):  तुर्की के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि सऊदी अरब ने तुर्की के इस्तांबुल में अपने वाणिज्य दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद सबूतों को छिपाने के खास मकसद से 2 विशेषज्ञों को भेजा था। एक जमाने में सऊदी के शाह परिवार के करीबी रहे और बाद में उनके आलोचक बन गए खशोगी की 2 अक्टूबर को इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी। हत्या के एक महीने से कुछ दिन बाद भी तुर्की को अभी तक उनका शव नहीं मिल सका है।दावे किए जा रहे हैं कि खशोगी की लाश को तेजाब में घोल दिया गया था। 59 वर्षीय पत्रकार की हत्या ने पश्चिम में सऊदी अरब की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है और शहजादे मोहम्मद बिन सलमान बचाव की मुद्रा में आ गए हैं। तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर होने की शर्त पर कहा, 'हमारा मानना है कि तुर्की की पुलिस को परिसर की तलाशी की अनुमति देने से पहले जमाल खशोगी की हत्या के सबूतों को छिपाने के एकमात्र मकसद से 2 लोग तुर्की आए थे।'मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने हुई हत्या की जांच करने के लिए सऊदी अरब से भेजे गए दल में रसायन विशेषज्ञ अहमद अब्दुल्ला अजीज अल-जनोबी और विष विज्ञान विशेषज्ञ खालिद याहिया अल जहरानी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के दल ने 11 अक्टूबर को यहां पहुंचने के दिन से 17 अक्टूबर तक रोजाना वाणिज्य दूतावास का दौरा किया। सऊदी अरब ने तुर्की की पुलिस को अंतत: मिशन में तलाशी की इजाजत 15 अक्टूबर को दी।सरकार समर्थक मीडिया में लगातार आरोपों के बाद तुर्की के मुख्य अभियोजक ने पिछले सप्ताह इस बात की पुष्टि की कि खशोगी जैसे ही वाणिज्य दूतावास में घुसे, उनकी गला दबाकर हत्या कर दी गई। तुर्की पुलिस की गहन तलाशी के बावजूद अभी तक खशोगी के अवशेष नहीं मिले हैं।

image source: Google

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