सऊदी अरब के ये हो गए हालात...विदेशी बैंकों से लेगा 662 अरब रुपए कर्ज़

रियाद (20 अप्रैल) :  सऊदी अरब विदेशी बैंकों से 10 अरब डॉलर ( करीब 662 अरब रुपए) का कर्ज़ लेगा। ब्लूमबर्ग न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक तेल से होने वाली कमाई के धड़ाम होने से राजस्व और खर्च में खाई बढ़ती जा रही है।

रिपोर्ट में तीन जानकार लोगों के हवाले से बताया गया है कि पिछले कम से कम 15 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि सऊदी अरब को इस तरह का कर्ज़ लेने की ज़रूरत पड़ी है। बता दें कि सऊदी अरब दुनिया में तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है।  

ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ये कर्ज़ पांच साल की अवधि के लिए होगा। सूत्रों के मुताबिक ये कर्ज़ अमेरिका, यूरोप, जापान और चीन के बैंकों से लिया जाएगा। ये कर्ज़ लंदन के इंटरबैंक ऑफर रेट से 120 बेसिक पाइंट्स ऊपर होगा।  

बता दें कि बीते दो साल से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर बैरल से घटकर अब 40 डॉलर बैरल पर चल रही हैं। इस वजह से सऊदी अरब पर अपने खर्च घटाने के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है। साथ ही उसे दूसरे आर्थिक विकल्पों पर ध्यान देना पड़ रहा है।

रियाद ने 2015 में रिकॉर्ड 98 अरब डॉलर का बजट घाटा पेश किया। इस साल भी 87 अरब डॉलर घाटे का अनुमान है। सऊदी अरब के सख्त वित्तीय उपायों की वजह से 2015 के मुकाबले इस साल बजट घाटे को थोड़ा कम किया जा सका। सऊदी अरब ने घरेलू बाज़ार में 30 अरब डॉलर के बॉन्ड भी जारी किए हैं।   

सऊदी अरब ने पिछले साल दिसंबर में अप्रत्याशित कदम उठाते हुए देश में तेल के दाम 80 फीसदी बढ़ाने की घोषणा की थी। इसके अलावा बिजली, पानी और अन्य सेवाओं पर सब्सिडी भी घटाती गई है।

सोमवार को सऊदी अरब ने भविष्य के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विज़न डॉक्यूमेंट भी पेश किया। इसमें नेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम भी शामिल है। इसके तहत देश की अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता घटाई जाएगी। बता दें कि सऊदी अरब का 70 फीसदी राजस्व तेल से आता है।