सऊदी तेल ठिकानों पर हौती विद्रोहियों के हमलों से दुनिया को झेलना पड़ सकता है तेल संकट

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14मई): समुद्र में तेल टैंकरों के बाद दो पंपिंग स्टेशनों पर ड्रोन से किये हमले से नाराज सऊदी अरब ने कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाली प्रमुख पाइपलाइन बंद कर दी है।  ऐसा कहा जा रहा है कि ईरान की तरफ झुकाव रखने वाले यमन के हौती विद्रोहियों ने सऊदी के अहम प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।  सऊदी अरब इन विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है, जिससे ये काफी नाराज हैं। अगर इस संकट का शीघ्र ही कोई हल न निकला तो दुनिया के बाकी देशों को भी तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है।एक दिन पहले ही संयुक्त अरब अमीरात के समुद्री क्षेत्र में कई तेल टैंकरों पर हमले की खबर आई थी, जिसके बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। ऊर्जा मंत्री खालिद अल फालिह ने कहा कि मंगलवार तड़के लाल सागर की ओर से तेल संपन्न पूर्वी प्रांत होकर गुजरने वाली पाइपलाइन पर दो पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया गया।  ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से रोजाना कम से कम 50 लाख बैरल तेल की आपूर्ति की जाती है। न्यूज एजेंसी एसपीए ने फालिह के हवाले से कहा है कि सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने एहतियाती उपाए किए हैं और पाइपलाइन के संचालन को अस्थायी तौर पर रोक दिया है। हालात का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित पंप स्टेशनों के परिचालन को बहाल करने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल उत्पादन और निर्यात में कोई रुकावट नहीं है।लगभग 1200 किलोमीटर की इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में मुख्य तेल क्षेत्र से पश्चिम में लाल सागर के किनारे बसे शहर यानबू तक कच्चे तेल को भेजा जाता है। खास बात यह है कि पाइपलाइन कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मूज जलडमरूमध्य वाले रास्ते के बंद होने की स्थिति में विकल्प के तौर पर काम कर सकती है।दरअसल, ईरान लगातार धमकियां देता रहा है कि अगर अमेरिका के साथ सैन्य तनाव बढ़ा तो वह जलडमरूमध्य वाले रास्ते को बंद कर देगा। ईरान से तनाव के बीच हाल ही में अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बमवर्षक विमानों और लड़ाकू जहाजों की तैनाती की है। सऊदी के दो जहाजों पर एक दिन पहले ही हमले हुए थे। हालांकि इसमें किसी की जान नहीं गई लेकिन तनाव बढ़ा हुआ है।जिन स्टेशनों को निशाना बनाने की बात की जा रही है उनमें रियाद के पश्चिम में दवादमी, अफीफ शामिल हैं। फालिह ने मंगलवार की घटना को आतंकी कृत्य करार दिया है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल किंगडम को टारगेट किया गया बल्कि दुनियाभर में तेल आपूर्ति की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी चोट करने की कोशिश की गई।इसके अतिरिक्त हौती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुसलाम ने ट्विटर पर स्वीकार किया है कि उन्होंने यमन की जनता पर किए जा रहे जनसंहार के खिलाफ जवाब देने के लिए हमले किए गए।  सऊदी अरब और यूएई ने अंतरराष्ट्रीय समर्थित सरकार को मजबूत करने के लिए मार्च 2015 में हूतियों के खिलाफ यमन संघर्ष में दखल दिया था।